Yaadein Shayari 1

दिल की ख्वाहिश को नाम क्या दूँ,
प्यार का उसे पैगाम क्या दूँ,
इस दिल में दर्द नहीं यादें है उसकी,
अब यादें ही मुझे दर्द दे तो उसे इलज़ाम क्या दूँ..
खुशी से दिल को आबाद करना,
गम को दिल से आज़ाद करना,
हमारी बस इतनी सी गुज़ारिश है,
कि हमें भी दिन में एक बार याद करना...
यादें रह जाती हैं और दिन गुजर जाते हैं,
देखते-देखते हरे-हरे बाग उजड़ जातें हैं,
वक्त के हाथों आदमी खिलोने होते हैं,
जीवन भर के हमसफ़र पल भर में बिछड़ जाते हैं...
आशिकी ने हम को क्या-क्या दिन दिखाए हैं,
अपने, पराये, घर और शहर छोड़ आयें हैं,
तेरी यादों को आजतक भूला नहीं पाएं हैं,
क्या हम भी कभी तुझे याद आयें हैं...
आज फिर दिल उदास है तुझे याद करके,
तड़प रहा हूँ मैं और तड़पा रहे हो तुम साँस बनके,
ये कैसा तुम्हारा इश्क है ज़ालिम..!
तेरी यादें रुला जाती हैं हंसा करके...
आपकी यादों के सिवा कोई सहारा नहीं,
आपको सोचे बिना दिन गुज़रता नहीं,
हर साँस में हमारी आप समाने लगे हो,
और आपने हमें अबतक ख्वाबों में उतारा नहीं...
कैसे-कैसे दिन तेरी आशिकी ने दिखायें हैं,
खून के आँसू बहुत रात दिन मैंने बहायें हैं,
तेरी बातें, तेरी यादें, तेरी अदायें.. अंदाज तेरे,
मत पूंछ जालिम हमें किस कदर सताते हैं...
निगाहें मिलाने को जी चाहता है,
तेरे पास आने को जी चाहता है,
काश वोही यादें फिर लौट आयें,
फिर तन्हाई महकने को जी चाहता है...
मेरी आँखें तेरे दीदार को तरसती हैं,
मेरी नस-नस तेरे प्यार को तरसती हैं,
तु तो बता सनम.. तुझको बताना कैसे है,
कि मेरी रूह तक तेरी याद में तड़पती है...
जब भी मेरे होटों पर तेरा नाम आता है,
तेरे तड़पते दिल को सनम आराम आता है,
यहाँ तन्हाई हैं, गम हैं, उदासियाँ हैं,
हर शाम, हाथों में तेरी याद का जाम आता है...