Waqt Shayari 4

जानु मैं उसकी हर एक बात,
आज भी याद आती है वो पहली मुलाक़ात,
गुज़रे वो लम्हें वो दिन और रात,
यही तो है वक़्त की मुझको सौगात...
कभी मीठी याद बनकर हँसता है,
तो कभी गुज़रा वक्त हमको रुलाता है,
दुनिया के हर साय हैं वक्त के कब्ज़े में,
हर चीज़ को वक्त गुलाम बनाता है...
जो मिला वक्त तो बुलाऊंगा उसे,
उसके दिए ज़ख्म भी दिखाऊंगा उसे,
उसकी ये तम्मना भी पूरी करूँगा एक रोज़,
जब निकलेगी आखरी साँस भूल जाऊंगा उसे...
वक्त की आंधी मैं तूफ़ान बदल जाते हैं,
ज़िन्दगी की राहों में इंसान बदल जाते हैं,
बदलते नहीं कभी प्यार करने वाले,
इंसान बदल जाते हैं...
वक्त और हालात सब कुछ सिखा देते हैं,
सजे सपनो को इस कदर मिटा देते हैं,
हो आँखे नम तो दर्द ज्यादा देते हैं,
हर रिश्ता अपनी अहमियत दिखा देते हैं,
सब रिश्ते ऐसे ही निभाते चले जाते हैं...
आपको वक्त आने पर मालूम होगा,
हर पल हमारी कमी को सहना होगा,
प्यार करने वाले तो बहुत मिलेंगे,
लेकिन हम जैसा दिलवाला कोई ना होगा...
झूठा अपनापन तो हर कोई जताता है,
वो अपना ही क्या जो पल-पल सताता है,
यकीन ना करना हर किसी पर क्योंकि,
करीब है कोई यह तो वक्त ही बताता है...
जिंदा हैं मगर जीने का इरादा बदल दिया,
वक्त के तूफ़ान ने हर एक वादा बदल दिया,
चल सके किसी के साथ इस काबिल ना रहे अब,
ठोकरों ने हमें इतना ज्यादा बदल दिया...
फिर कब मिलेंगे ये उन्होंने पूछा नहीं,
क्यों हो रहे हैं जुदा ये हमने बताया नहीं,
कब उनके आंसुओं ने हमको बेवफा कहा,
पता ही नहीं बस वो वक़्त ही कुछ ऐसा था,
जिसको हमने पहचाना नहीं...
वक़्त फिसलता है रेत की तरह,
हम बस उसे संभालना भूल जाते हैं,
कुछ लोग बहुत ख़ास होते हैं ज़िन्दगी में,
हम बस उन्हें बताना भूल जाते हैं...