Waqt Shayari 3

वक्त कहता है फिर ना आऊंगा,
तेरी आँखों को अब ना रुलाऊंगा,
जीना है तो इस पल को जी ले,
शायद में कल तक ना जी पाउँगा...
अब तो हम तेरे लिए अजनबी हो गए,
बातों के सिलसिले भी कम हो गए,
खुशियों से ज्यादा हमारे पास गम हो गए,
क्या पता ये वक्त बुरा है या बुरे हम हो गए...
वक्त की आंधी में तूफ़ान बदल जाते हैं,
ज़िन्दगी की राहों में इंसान बदल जाते हैं,
बदलते नहीं कभी प्यार करने वाले,
इंसान बदल जाते हैं...
जानु मैं उसकी हर एक बात,
आज भी याद आती है वो पहली मुलाकात,
गुजरे वो लम्हें वो दिन और रात,
यही तो है वक्त की मुझ को सौगात...
कुछ इस तरह मैंने ज़िन्दगी को आसां कर लिया,
किसी से माफ़ी मांग ली किसी को माफ कर दिया..
रात नहीं ख्याब बदलता है,
मंजिल नहीं कारवाँ बदलता है,
जज्बा रखो जितने का,
क्योंकि किस्मत बदले ना बदले,
पर वक्त जरुर बदलता है...
जब आपका नाम जुबान पर आता है,
पता नहीं दिल क्यों मुस्कुराता है,
तसल्ली होती है मन को कोई तो है अपना,
जो हंसते हुए हर वक़्त याद आता है...
वक्त का कोई भी मंजर मुझे अब रास नहीं आता,
बहते पानी से ये दिन भी निकल जाएंगे,
गुरूर रात का टूटेगा तो जरूर,
मगर ख्वाब हज़ार हमारे भी बिखर जाएंगे...
अक्सर मुझे लम्हों ने हराया है,
वक्त कहता है तेरा घर ही पराया है,
जलाते तो बहुत हैं खुद को लेकिन,
जलता नहीं है वो हिस्सा जिसमें तू समाया है...
वक़्त होना चाहिए किसी को याद करने के लिए,
बहाना तो अपने आप मिल जाता है,
जब याद ही ना करना हो किसी को,
तो वक़्त ही बहाना बन जाता है...