Waqt Shayari 1

उनका भरोसा मत करो,
जिनका ख्याल वक्त के साथ बदल जाए,
भरोसा उनका करो जिनका ख्याल वैसे ही रहे,
जब आपका वक्त बदल जाए...
माँ की लोरी का एहसास तो है,
पर माँ को माँ कहने का वक्त नहीं,
सारे रिश्तों को तो हम मार चुके,
अब उन्हें दफ़नाने का भी वक्त नहीं...
हर वक्त होठों पर आपके हँसी हो,
हर पल दिल में आपके खुशी हो,
सितारे भी ज़मी पर आकर आपको घेर लें,
ऐसी चाँद की तरह चमकती आपकी ज़िन्दगी हो...
पैसों की दौड़ में ऐसे दौड़े,
कि थकने का भी वक्त नहीं,
पराये एहसासों की क्या कदर करें,
जब अपने सपनों के लिए ही वक्त नहीं...
अब तो हम तेरे लिए अजनबी हो गए,
बातों के सिलसिले भी कम हो गए,
खुशियों से ज्यादा हमारे पास गम हो गए,
क्या पता ये वक्त बुरा है या बुरे हम हो गए...
कलम उठाई है लफ्ज़ नहीं मिलता,
जिसको ढूंढ़ रहे हैं वो शक्स नहीं मिलता,
फिरते हैं वो जमाने की तलाश में,
बस हमारे लिए ही उन्हें वक़्त नहीं मिलता...
हर खुशी है लोगों के दामन में,
पर एक हँसी के लिए वक्त नहीं,
दिन रात दौड़ती दुनिया में,
ज़िन्दगी के लिए ही वक्त नहीं...
वक्त से वक्त की क्या शिकायत करें,
वक्त ही न रहा वक्त की बात है,
उसने देखा मुझे उसने चाहा मुझे,
उसने ठुकरा दिया, वक्त की बात है...
कभी एक लम्हा ऐसा भी आता है,
जिसमें बीता हुआ कल नज़र आता है,
बस यादें रह जाती हैं याद करने के लिए,
और वक्त सब कुछ लेके गुज़र जाता है...
वक्त से ज्यादा ज़िन्दगी में,
कोई भी अपना और पराया नहीं होता,
अगर वक्त अपना है तो सभी अपने होते हैं,
और अगर वक्त ही पराया हो तो,
अपने भी पराये हो जाते हैं..