Tanhai Shayari 2

सदा दूर रहो गम की परछाईयों से,
सामना ना हो कभी तनहाइयों से,
हर अरमान हर ख्वाब पूरा हो आपका,
यही दुआ है दिल की गहराईयों से...
देखकर तनहा मुझसे पूछा बहारों ने,
कहाँ गया तेरा वो हमसफ़र,
तुझे तो बड़ा नाज़ था उस पर,
ये देखकर में चुप रही..
मगर मेरे आंसुओं ने जवाब दिया,
मिलना किस्मत में था,
बिछड़ना नसीब था,
वो मुझसे इतना दूर हो गया,
जितना वो मेरे करीब था...
अघोष में लेलो मुझे तनहा हूँ मैं,
बसा लो दिल की धड़कन में तनहा हूँ मैं,
जो तुम नहीं ज़िन्दगी में तो फिर कुछ नहीं,
समां जाओ मुझ में कि तनहा हूँ मैं...
तन्हाई से डर नहीं लगता मुझे,
महफ़िल से घबरा जाता हूँ मैं,
कोशिश करता हूँ यादें दफ़नाने की,
मगर तुझको भूल नहीं पाता हूँ मैं...
तनहा हूँ तो अब मैं खुश हूँ,
ना बिछड़ जाने का गम न किसी का इंतज़ार होता है,
चलता हूँ तो लगता है कि कोई साथ है मेरे,
पलट कर देखता हूँ तो मेरा साया ही बस हर बार होता है...
तेरे बिना कैसे मेरी गुज़रेंगी ये रातें,
तन्हाई का गम कैसे सहेंगी ये रातें,
बहुत लम्बी हैं ये घड़ियाँ इंतज़ार की,
करवट बदल-बदल कर कटेंगी ये रातें...
इतनी बेदरदी से दिल को मेरे वो तोड़ देगी,
ये मालूम ना था मुझे अकेला वो छोड़ देगी,
ए मेरे मासूम दिल तु तन्हाई से प्यार करले,
बेवफा भी अब वफ़ा का साथ छोड़ देगी...
अपनी बेबसी पर आज रोना सा आया,
दूसरों को नहीं मैंने अपनों को आजमाया,
हर दोस्त की तन्हाई दूर की,
लेकिन खुद को हर मोड़ पर तनहा ही पाया...
काश कोई मिले इस तरह कि फिर जुदा ना हो,
वो समझे मेरे मिजाज़ को और कभी खफा ना हो,
अपने एहसास से बाँट ले सारी तन्हाई मेरी,
इतना प्यार दे जो पहले कभी किसी ने दिया ना हो...
अगर मुझसे मोहब्बत नहीं तो रोते क्यूँ हो,
तन्हाई में मेरे बारे में सोचते क्यूँ हो,
अगर मंजिल जुदाई है तो जाने दो मुझे,
लौटके कब आओगे पूछते क्यूँ हो...