Sharabi Shayari 3

जिसका साथ सारी दुनिया छोड़ देती है,
उनके हाथों में अक्सर पाई जाती है शराब,

कभी भी अपने ग़मों को भूलना हो तो कह देना,
कितने भी बड़े गम में किसी को भी हँसाती है शराब,

पंख लगा के आसमान में उड़ जाते हैं जो पंछी,
दो घूट पी लेने पर उन्हें बाँहों में ले आती है शराब...
ऐसी किरण हूँ, जिसे सूरज ने कभी अपना नहीं समझा,
ऐसी खुशबू हूँ, जिसे फूलों ने अपना नहीं समझा,
ऐसी धड़कन हूँ, जिसे दिल ने कभी अपना ना समझा,
लेकिन खुशनसीब हूँ, जो इस शराबी को मैंखाने ने अपना समझा...
होंठों पे आज उनका नाम आ गया,
प्यासे के हाथ में आज जाम आ गया,
डोले कदम तो गिरे उनकी बाहों मैं जाके,
आज तो पीना भी हमारे काम आ गया...
शराबी बनकर खुश हो लेता हूँ,
हर जाम से दर्द भर लेता हूँ,
एक बेवफा का नशा तो मुझे हर पल रहता है,
इस शराब से थोड़ा होश संभाल लेता हूँ,
कहो सनम से मुझे और पीने दे,
यारों थोड़ा अपने लिए भी जी लेता हूँ...
चारों तरफ तन्हाई का साया है,
ज़िन्दगी में प्यार किसने पाया है,
हम यादों में झूमते हैं उनकी,
और ज़माना कहता है आज फिर पीकर आया है...
दूरियां आसानी से मिटाती है शराब,
मजबूरियों को नशे में नचाती है शराब,
आँसुओं को मिला दे तू अपने हर एक जाम में,
फिर देख कैसे यादों को और करीब लाती है शराब...
मदहोश हम हरदम रहा करते हैं,
और इलज़ाम शराब को दिया करते हैं,
कसूर शराब का नहीं उनका है यारों,
जिनका चेहरा हम हर जाम में तलाश किया करते हैं...
जाम में अफ़साने ढूंढते हैं हम लोग,
लम्हों में ज़माने ढूंढते हैं हम लोग,
तु ज़हर दे दे शराब कह कर सनम,
अब तो मरने के बहाने ढूंढते हैं हम लोग...
ज़िन्दगी है जीने के लिए तो जीया क्यूँ ना जाए,
उसकी बेवफाई ने दिया मौका तो पिया क्यूँ ना जाए...
दिल में एक दर्द लिए जिए जा रहा हूँ,
तेरी मोहब्बत का जाम पिए जा रहा हूँ,
ना चाहते हुए भी ये काम किये जा रहा हूँ,
ना जाने खुद को कौन सी मंजिल पर लिए जा रहा हूँ...