Sharabi Shayari 1

जिसका साथ सारी दुनिया छोड़ देती है,
उनके हाथों में अक्सर पाई जाती है शराब,

कभी भी अपने ग़मों को भूलना हो तो कह देना,
कितने भी बड़े गम में किसी को भी हँसाती है शराब,

पंख लगा के आसमान में उड़ जाते हैं जो पंछी,
दो घूट पी लेने पर उन्हें बाँहों में ले आती है शराब...
आशिकों को मोहब्बत के आलावा अगर कुछ काम होता,
तो मैंखाने जाके हर रोज़ यूँ बदनाम ना होता,
मिल जाती चाहने वाली उसे भी कहीं राह में कोई,
अगर क़दमों में नशा और हाथ में जाम ना होता...
रोक दो मेरे जनाज़े को जालिमों,
मुझमें जान आ गयी है,
पीछे मुड़के देखो कमीनो,
दारू की दुकान आ गयी है...
पीके रात को हम उनको भुलाने लगे,
शराब में गम को मिलाने लगे,
दारू भी बेवफा निकली यारों,
नशे में तो वो और भी याद आने लगे...
जाम पे जाम पिने से क्या फायदा,
शाम को पी सुबह उतर जाएगी,
अरे दो बूँद मेरे प्यार की पी ले,
ज़िन्दगी सारी नशे में ही गुजर जाएगी...
रात चुप है मगर चाँद खामोश नहीं,
कैसे कहूँ आज फिर होश नहीं,
इस तरह डूबा हूँ तेरी मोहब्बत की गहराई में,
हाथ में जाम है और पीने का होश नहीं..
तेरी आँखों के ये जो प्याले हैं,
मेरी अँधेरी रातों के उजाले हैं,
पीता हूँ जाम पर जाम तेरे नाम का,
हम तो शराबी.. बे-शराब वाले हैं...
दूसरों के लिए ख़राब ही सही,
हमारे लिए तो ज़िन्दगी बन जाती है,
सौ ग़मों को निचोड़ने के बाद ही,
एक कतरा शाराब बन जाती है...
ए-सनम और पिला.. कि पिलाने की रात है,
पी-पी के आज होश में ना आने की रात है,
ले आज शराब में मुझको डुबो दे,
मैंने सुना है आज प्यास बुझाने की रात है...
यादों से सलाम लेता हूँ,
वक्त के हाथ थाम लेता हूँ,
ज़िन्दगी थम जाती है पल भर के लिए,
जब हाथों में शराब-ए-जाम लेता हूँ...