Sapne Shayari 1

केवल वो ही सपने सच नहीं होते,
जो सोते वक्त देखे जाते हैं,
सपने वो ही सच होते हैं जिनके लिए,
आप सोना ही छोड़ देते हैं...
सपनों की दुनिया में खोते चले गए,
होश में थे फिर भी मदहोश होते चले गए,
जाने क्या बात थी उस अजनबी में,
ना चाहते हुए भी उसके होते चले गए...
निगाहें उनको देखना चाहें तो नज़र का क्या कसूर,
हर पल खुशबू उनकी आए तो साँसों का क्या कसूर,
यूँ तो कभी सपने हमें पूछकर नहीं आते,
पर सपने सिर्फ उनके आएं तो सपनों का क्या कसूर...
सोचा था चैन से सोयेंगे कब्र में,
पर यहाँ भी तेरी याद सताती है,
पलकें तो ज़माने से बंद हैं,
लेकिन आँखें आज भी तेरे सपने सजाती हैं...
जिनके दिल पर लगती है वो आँखों से नहीं रोते,
जो अपनों के नहीं हुए वो किसी के नहीं होते,
वक़्त ने मुझे अक्सर ये सिखाया है,
सपने टूट जाते हैं लेकिन पूरे नहीं होते...
सपने थे सपनों के आप साहिल हुए,
ना जाने कैसे हम आपकी दोस्ती के काबिल हुए,
करज़दार रहेंगे हम उस हसीं पल के,
जब आप हमारी ज़िन्दगी में शामिल हुए...
पाकर तुम्हें सपने सच लगने लगे,
अजनबी से थे जो कभी आज अपने लगने लगे,
होता नहीं यकीं खुद की किस्मत पर,
धड़कनों में बसकर वो अब हमारी जान लगने लगे...
रंग दिखाती है ये ज़िन्दगी कितने,
गैर भी हो जाते हैं एक पल में अपने,
ना जाना कभी तुम सपनों की दुनिया में,
क्योंकि टूट जाता है दिल जब टूटते हैं सपने...
पलकों में कैद कुछ सपने हैं,
कुछ बेगाने और कुछ अपने हैं,
ना जाने क्या कशिश है इन ख्यालों में,
कुछ लोग हमसे दूर होके भी कितने अपने हैं...
कुछ बिखरे सपने और आँखों में नमी है,
एक छोटा सा आसमा और उम्मीदों की ज़मीं है,
यूँ तो बहुत दोस्त हैं ज़िन्दगी में,
पर जो ख़ास है वो ही पास नहीं है...