Sad Shayari 1

तनहाइयों के शहर में एक..
घर बना लिया,
रुसवाइयों को अपना मुक़द्दर..
बना लिया,
देखा है यहाँ पत्थर को..
पूजते हैं लोग,
इसलिए हमने अपने दिल को भी..
पत्थर बना लिया
मोहब्बत का नतीजा,
दुनिया में हमने बुरा ही देखा,
जिन्हें दावा था वफ़ा का,
उन्हें भी हमने बेवफा होते देखा...
वक्त नूर को बेनूर कर देता है,
छोटे से जख्म को नासूर कर देता है,
कौन चाहता है अपने से दूर होना,
लेकिन वक्त सबको मजबूर कर देता है...
जिंदगी है सफर का सील सिला,
कोई मिल गया कोई बिछड़ गया,
जिन्हें माँगा था दिन रात दुआओं में,
वो बिना माँगे किसी और को मिल गया...
देखकर उसको अक्सर हमें एहसास होता है,
कभी-कभी गम देने वाला भी बहुत ख़ास होता है,
ये और बात है वो हर पल नहीं होता हमारे पास,
मगर उसका दिया गम अक्सर हमारे पास होता है...
ना सोचा था जिनके लिए हम मर मिटे,
एक दिन वही हमसे दूर हो जायेंगें,
जीने की तमन्ना तो हम भी रखते थे,
अब तेरे बिना कैसे जी पायेंगें
समझोता हमें हमारी ज़िन्दगी से हो गया,
सिर निचा शर्मंदगी से हो गया,
किसी की नज़र से कभी ना गिरे थे हम,
ये बदनाम उनकी दिल्लगी से हो गया...
भूलना चाहो तो भी याद हमारी आएगी,
दिल की गहराई में हमारी तस्वीर बस जाएगी,
ढूढ़ने चले हो हमसे बेहतर दोस्त,
तलाश हमसे शुरू होकर हमपे ही ख़त्म हो जाएगी...
तेरे मिलने कि आस न होती,
तो जिंदगी आज यु उदास न होती,
हो जाता जो तेरा दीदार एक बार,
तो हमको आज तेरी तलाश न होती..
जिंदगी जख्म की तस्वीर बनके रह गई,
तू मेरे दिल पे लगी तीर बनके रह गई,

मैं बना फिरता हूँ दीवाना तेरे गम में,
तू मेरे पैरों की जंजीर बनके रह गई,

इस जमाने के तानों को सुनते-सुनते,
ये तमाशा मेरी तकदीर बनके रह गई,

सरहदें पारकर हम-तुम न मिल पाए कभी,
ये मोहब्बत भी कश्मीर बनके रह गई...