Patriotic Shayari 4

नहीं वो वतन मेरा पर फिर भी प्यारा लगता है,
उसी की याद में डूबा दिन सारा रहता है,

कब जाऊं में वहां, हर वक़्त ये इंतज़ार रहता है,
है रुकावटें लाखों मगर, सच्चे दिल का साथ खुदा देता है,

कभी तो होगी नसीब उसकी ज़मीन मुझे, दिल होसलों से बुलंद रहता है,
होते हैं जो शहीद उसके लिए, दिल सलाम उनको कहता है,

है वादा हमें आसमानों का रहेगा अक्श हमेशा कायम,
कि जिसका हाफ़िज़ हो खुदा उसे कौन मिटा सकता है...
योजनायें इतनी मेहरबान हो गयीं,
गरीबों की बस्ती शमशान हो गयीं,

गरीबी हटाओ फार्मूला यूँ हुआ सिद्ध,
झोपड़ी को नोचने लगे महलों के गिद्ध,

मजदूर किसान का आलम देखा फ़क़ीर,
हराम के दलाल हो रहे अमीर,

साथ साल का बच्चा है बरतन धोने विवश,
शर्म नहीं है फिर भी मनाते बल दिवस,

धीरे-धीरे तबाह हो रहा है देश,
लादें हैं धरे अश्क गाँधी का भेष...
मौके पर जो चुप रह जाते, बेमौसम में गाते हैं,
ऐसे लोग आज दुनिया में, ज्यादा कष्ट उठाते हैं,

खुद को भी तो कभी देख लो उन लोगों से कहना है,
व्यर्थ दूसरों को इंगितकर, ऊँगली रोज़ उठाते हैं,

दंगे भड़काने वालों को कोई नहीं पकड़ पाया,
वो तो महलो में रहते हैं, कब सड़कों पर आते हैं,

जिसका दिल काला है उसकी रातें उतनी ही काली,
लोगों को दिखलाने गंगा रोज़ नहाते हैं,

सीधा-सच्चा आम आदमी जल्दी धोखा खाता है,
तस्कर चोर लुटेरा डाकू तो संसद बन जाते हैं,

मुद्दा एक राम मंदिर का बरसों-बरस पुराना है,
केवल जब चुनाव आता है राम याद आते हैं,

जात-पात का विष फैलाकर मिटा दिया भाई-चारा,
सारा भारत एक हमारा नारा रोज़ लगाते हैं...
झंडों की नुमाईश से कुछ नहीं होगा,
नारों की ऊंचाईयों से कुछ नहीं होगा,
झांक कर देखो गरीबों की ज़िन्दगी को,
आश्वासनों की मिठाई से कुछ नहीं होगा...
थी मिट्टी जिसकी सोने जैसी,
हालत हो गई है आज रोने जैसी,

सबने लूटा मेरे देश को, आज भी लुट रहा है,
धागे थे कच्चे इसके, ज़ात की आग से टूट रहा है,

देख रहे हैं सब एक नज़र से तरक्की इसकी,
मिट ना पाई अबतक 'अज़ीम' गरीबी इसकी...
कहते हैं सभी आतंकवाद इन्हें,
हाल इनका लेकिन किसी ने ना जाना,

क्यों बने आतंकवाद ये, ना पूंछा किसी ने,
लगे हैं सब इनपर तोहमत लगाने,

बेरोजगारी जब बढ़ जाए,
घर में भूखे जब मर जाएँ,

इज्जत औरतों की सस्ती पड़ जाए,
तो पड़ता है मजलूमों को ऐसा कदम उठाना,

अगर मिल जाए हक इन्हें इनका,
तो कैसा आतंकवाद,

जब देते हैं जान फ़िज़ूल में ये,
आता है मोहब्बत पे इन्हें भी जान लुटाना...
बेशक़ यक़ीनन दिखता नहीं कोई और ज़हान,
दुनियाँ से सुंदर है मेरा देश भारत महान,

सितारों से आगे चन्दा-सा रोशन पूरे हो अरमान,
दूजा नहीं और कोई यहाँ मेरे देश जैसा महान,

ना आँखों की खता ना झूठा है दिल का ख्याल,
हर मज़हब के फूल से महके मेरा भारत महान,

सवाल जेहन होगा क्यों लगता देश अपना महान,
क्या करूँ आँखों को जँचता नहीं कोई और महान,

यहीं पैदा हुआ यहीं जान जाए यही है आरज़ू,
हर जन्म हो यहीं जीना-मरना ये देश है महान...
मुक़द्दर से मिलता मौका, कुछ कर गुज़रने का,
देश खातिर जीने का और देश खातिर मिटने का,

जान कीमती है माना और मरना एक दिन ज़रूरी,
मकसद के लिए जान जाए, मज़ा उसमें मरने का,

चैन से सब जी सकें, वीर अपनी जान लूटा गये,
वीरों  के सामने जी करता, झुक सलाम करने का,

चर्चे बहुत सुने और सुनने, इनकी गाथा कुछ और,
कभी-कभी दिल करता है, इनकी गाथा लिखने का,

तिरंगा है जान तिरंगा मान, तिरंगे खातिर ज़िंदा हैं,
यही कहते-लिखते, मन है तिरेंगे खातिर जान देने का...
मेरा मुल्क मेरी जान है, तेरा मुल्क तेरी जान,
तू कर हिफाज़त अपनी सरहदों की, मैं करूँ ये काम ब-खूबी,

तू सिपाही है अपने मुल्क का, तेरा मुल्क तेरी आन बान-शान,
मैं देता हूँ जान सरहदों पर, एक सी है अपनी शहीदों की पहचान,

तेरे मुल्क की मिट्टी-हवा सब, मेरे वतन जैसी है,
तेरी माँ-बहन-बेटी हर रिश्ता, मेरे रिश्तों जैसा है,

कहने को हम दुश्मन हैं, पर हैं तो सब एक ही इंसान,
वतन के उन वीरों को है सलाम, अपने मुल्क खातिर होते जो कुर्बान...
रोटी की नहीं उन्माद की चिंता है,
विकास की नहीं वोट की चिंता है,
कैसे बाँटें सबको इस बात की चिंता है,

पड़ोसी-पड़ोसी को लड़ाए भाई-भाई को,
अमन की बातें करने वाले अमन तोड़ें,
खून बहता बहे इनको अपनी चिंता है,

ये वो धरती जिसे शहीदों ने सिंचा,
मज़हब नहीं अपनी इंसानियत से जीता,
वक़्त बदला यारों अब कुर्सी की चिंता है,

आदमी चाहे तो पत्थर भी मोम बना दे,
नदियों का रुख़ मोड़ बंजर को खिला दे,
आओ मिल जायें सभी यह देश की चिंता है...