Patriotic Shayari 4

कहते हैं सभी आतंकवाद इन्हें,
हाल इनका लेकिन किसी ने ना जाना,

क्यों बने आतंकवाद ये, ना पूंछा किसी ने,
लगे हैं सब इनपर तोहमत लगाने,

बेरोजगारी जब बढ़ जाए,
घर में भूखे जब मर जाएँ,

इज्जत औरतों की सस्ती पड़ जाए,
तो पड़ता है मजलूमों को ऐसा कदम उठाना,

अगर मिल जाए हक इन्हें इनका,
तो कैसा आतंकवाद,

जब देते हैं जान फ़िज़ूल में ये,
आता है मोहब्बत पे इन्हें भी जान लुटाना...
बस एक बूंद लहू की भरदे मेरी शिराओं में,
लहरा दूँ तिरंगा मैं इन हवाओं में,
फेहरा दूँ विजय पताका चारों दिशायों में,
महकती रहे मिट्टी वतन की, गूंजती रहे गूंज जित की,
सदियों तक सारी फिजाओं में...
बेशक़ यक़ीनन दिखता नहीं कोई और ज़हान,
दुनियाँ से सुंदर है मेरा देश भारत महान,

सितारों से आगे चन्दा-सा रोशन पूरे हो अरमान,
दूजा नहीं और कोई यहाँ मेरे देश जैसा महान,

ना आँखों की खता ना झूठा है दिल का ख्याल,
हर मज़हब के फूल से महके मेरा भारत महान,

सवाल जेहन होगा क्यों लगता देश अपना महान,
क्या करूँ आँखों को जँचता नहीं कोई और महान,

यहीं पैदा हुआ यहीं जान जाए यही है आरज़ू,
हर जन्म हो यहीं जीना-मरना ये देश है महान...
मुक़द्दर से मिलता मौका, कुछ कर गुज़रने का,
देश खातिर जीने का और देश खातिर मिटने का,

जान कीमती है माना और मरना एक दिन ज़रूरी,
मकसद के लिए जान जाए, मज़ा उसमें मरने का,

चैन से सब जी सकें, वीर अपनी जान लूटा गये,
वीरों  के सामने जी करता, झुक सलाम करने का,

चर्चे बहुत सुने और सुनने, इनकी गाथा कुछ और,
कभी-कभी दिल करता है, इनकी गाथा लिखने का,

तिरंगा है जान तिरंगा मान, तिरंगे खातिर ज़िंदा हैं,
यही कहते-लिखते, मन है तिरेंगे खातिर जान देने का...
मेरा मुल्क मेरी जान है, तेरा मुल्क तेरी जान,
तू कर हिफाज़त अपनी सरहदों की, मैं करूँ ये काम ब-खूबी,

तू सिपाही है अपने मुल्क का, तेरा मुल्क तेरी आन बान-शान,
मैं देता हूँ जान सरहदों पर, एक सी है अपनी शहीदों की पहचान,

तेरे मुल्क की मिट्टी-हवा सब, मेरे वतन जैसी है,
तेरी माँ-बहन-बेटी हर रिश्ता, मेरे रिश्तों जैसा है,

कहने को हम दुश्मन हैं, पर हैं तो सब एक ही इंसान,
वतन के उन वीरों को है सलाम, अपने मुल्क खातिर होते जो कुर्बान...
रोटी की नहीं उन्माद की चिंता है,
विकास की नहीं वोट की चिंता है,
कैसे बाँटें सबको इस बात की चिंता है,

पड़ोसी-पड़ोसी को लड़ाए भाई-भाई को,
अमन की बातें करने वाले अमन तोड़ें,
खून बहता बहे इनको अपनी चिंता है,

ये वो धरती जिसे शहीदों ने सिंचा,
मज़हब नहीं अपनी इंसानियत से जीता,
वक़्त बदला यारों अब कुर्सी की चिंता है,

आदमी चाहे तो पत्थर भी मोम बना दे,
नदियों का रुख़ मोड़ बंजर को खिला दे,
आओ मिल जायें सभी यह देश की चिंता है...
हक मिलता नहीं लिया जाता है,
आज़ादी मिलती नहीं छीनी जाती है,
हम नमन करते हैं उन देश प्रेमियों को,
जो देश की आजादी की जंग के लिए जाने जाते हैं...
अधिकार मिलते नहीं लिए जाते हैं,
आजाद हैं मगर गुलामी किए जाते हैं,
वंदन करो उन सेनानियों को,
जो मौत के आँचल में जिए जाते हैं...
वतन हमारा मिसाल मोहब्बत की,
तोड़ता है दीवार नफरत की,
मेरी खुश नसीबी, मिली ज़िन्दगी इस चमन में,
भुला ना सके कोई इसकी खुशबू सातों जन्म में..
आओ देश का सम्मान करें,
शहीदों की शहादत याद करें,
एक बार फिर से राष्ट्र की कमान,
हम हिन्दुस्तानी अपने हाथ धरें,
आओ, स्वंतंत्र दिवस का मान करें...