Patriotic Shayari 2

अधिकार मिलते नहीं लिए जाते हैं,
आजाद हैं मगर गुलामी किए जाते हैं,
वंदन करो उन सेनानियों को,
जो मौत के आँचल में जिए जाते हैं...
इश्क तो करता है हर कोई,
महबूब पे मरता है हर कोई,
कभी वतन को महबूब बना कर देखो,
तुझपे मरेगा हर कोई...
जमाने भर में मिलते हैं आशिक कई,
मगर वतन से खुबसूरत कोई सनम नहीं होता,
नोटों में भी लिपटकर, सोने में सिमटकर मरे हैं कई,
मगर तिरंगे से खुबसूरत कोई कफ़न नहीं होता...
दुश्मनी के लिए ये याद नहीं रहता,
वतन मेरा दोस्ती पर कुर्बान है,
नफरत पाले कोई उड़ान नहीं भरता,
दिलों में चाहत ही मेरे वतन की शान है...
वतन है मेरा सबसे महान,
प्रेम सौहाद्र का दूजा नाम,
वतन-ए-आबरू पर है सब कुर्बान,
शांति का दूत है मेरा हिन्दुस्तान...
अधिकार मिलते नहीं लिए जाते हैं,
आजाद हैं मगर गुलामी किए जाते हैं,
वंदन करो उन सेनानियों को,
जो मौत के आँचल में जिए जाते हैं...
आज़ादी की कभी शाम नहीं होने देंगे,
सहिदों की कुरबानी बदनाम नहीं होने देंगे,
बची हो जो एक बूंद भी गरम लहू की,
तब तक भारत माता का आँचल नीलाम नहीं होने देंगे...
तैरना है तो सागर की लहरों में तैरो,
किनारों में क्या रखा है,
मोहब्बत करना है तो वतन से करो,
लड़कियों में क्या रखा है...
जुल्म देख रोती हैं आँखें, जुल्मी को कोई भोंके सलाखे,
पीकर गम देती हैं खुशियाँ, पथ दिखलाती हैं ये अंखियाँ,

नहीं होती हैं निर्दयी आँखें, एक दूजे पे रोती हैं आँखें,
टूट जाए जब मिट्टी का पुतला, रुक जाए जब प्राणों का मसला,

निकाल लेना तुम मेरी आँखें, किसी यार को दे देना ये मेरी आँखें,
मैं मर जाऊं कभी ये गम नहीं, ना जले कभी ये मेरी आँखें,

कभी किसी पे ना करें, जुल्म ये मेरी आँखें,
आंच जो आए भारत माँ पे, समंदर बन जाए ये मेरी आँखें...
बस एक बूंद लहू की भरदे मेरी शिराओं में,
लहरा दूँ तिरंगा मैं इन हवाओं में,
फेहरा दूँ विजय पताका चारों दिशायों में,
महकती रहे मिट्टी वतन की, गूंजती रहे गूंज जित की,
सदियों तक सारी फिजाओं में...