Naseeb Shayari 4

तकदीर का रंग कितना अजीब है,
अनजाना रिश्ता है फिर भी करीब है,
हर किसी को दोस्त आप जैसा नहीं मिलता,
मुझे आप मिले ये मेरा नसीब है...
मुझे तुमसे मिलने की तकदीर नज़र आई,
मुझे अपने पैरों में ज़ंजीर नज़र आई,
जितने आंसू बहाए तेरी याद में,
हर आंसू में तस्वीर तेरी नज़र आई...
तन्हा था इस दुनिया की भीड़ में,
सोचा कोई नहीं मेरी तकदीर में,
एक दिन आपने दोस्ती का हाथ बढ़ाया,
तो लगा कुछ तो खास था हाथों की लकीर में...
सपने की तरह तुम्हें सज़ा के रखूं,
चांदनी रात की नज़रों से छुपा के रखूं,
मेरी तकदीर मेरे साथ नहीं है,
वरना ज़िन्दगी भर तुम्हें अपना बना के रखूं...
कोई ना मिले तो किस्मत से गिला नहीं करते,
अक्सर लोग मिलकर भी मिला नहीं करते,
हर शाख पर बहार आती है ज़रूर,
पर हर शाख पर फूल खिला नहीं करते...
हमने भी चाहा हर मंज़िल करीब हो,
हर वक़्त आपका साथ नसीब हो,
पर वहाँ खुदा भी क्या करे,
जहाँ इंसान बदनसीब हो...
ख्वाब सच हो तो तबीर भी मिल जाती है,
याद भी अक्सर एक तस्वीर में बदल जाती है,
कुछ मांगो अगर तो मांगो सच्चे दिल से,
एक दुआ से अक्सर तकदीर बदल जाती है...
ना जाने क्यों ये आँखें उदास रहती हैं,
इन आँखों में किसी की प्यास रहती है,
ये जानकार भी की वो मेरी किस्मत में नहीं,
फिर भी क्यों उसे पाने की आस रहती है...
जब कभी आँख में अश्क भर आए,
कुछ लोग डूबते नज़र आए,
हम इंतज़ार कर रहे थे बरसों से जिनका,
मेरा नसीब है कि आज वो उधर आए..
बदलने वाले तो हर चीज़ बदल देते हैं,
कमान से निकला तीर बदल देते हैं,
तुम तो मेरे चार आंसू ना बदल सके,
बदलने वाले तो तकदीर बदल देते हैं...