Motivational Shayari 1

ना पूछो की मेरी मंज़िल कहाँ है,
अभी तो सफ़र का इरादा किया है,
ना हारुँगा हौसला उम्र भर,
ये मैंने किसी से नहीं खुद से वादा किया है...
बनो तो ऐसे बनो की दुश्मन भी तुम्हें याद करे,
हँसों तो ऐसे हँसों की गम भी तुम्हारे साथ हँसे,
जियो तो ऐसे जियो की खुदा भी तुम पर नाज़ करे...
करे कोशिश अगर इंसान तो क्या-क्या नहीं मिलता,
वो सर उठा के तो देखे जिसे रास्ता नहीं मिलता,
भले ही धूप हो काटे हों राहों में, पर चलना तो पड़ता ही है,
क्योंकि किसी प्यासे को घर बैठे दरिया नहीं मिलता...
ज़िन्दगी हर कदम पर एक नया मुकाम देती है,
मुसीबत में गिर कर संभलना फिर हौसलों का इम्तिहान लेती है,
जो भवर को चिर कर निकलते हैं,
ये दुनियाँ फिर उनको सलाम करती है...
इन नफरत की दीवारों को तोड़ेगा कौन,
अगर दिग्गज नहीं करेंगे, तो पहल करेगा कौन,
इस दुनिया में बहुत रास्ते हैं चलने के लिए,
अगर आज़ादी से पहले मरना पड़ता है,
अगर तू मरने से डर गया तो तुझे आज़ाद करवाएगा कौन...
जो सफ़र इख़्तियार करते हैं,
वही मंजिलों को पार करते हैं,
बस एक बार चलने का हौसला रखो मेरे दोस्त,
ऐसे मुसाफिरों के तो रास्ते भी इंतज़ार करते हैं...
भगवान का दिया कभी 'अल्प' नहीं होता,
जो बीच में टूट जाए वो 'संकल्प' नहीं होता,
हार को लक्ष्य से दूर ही रखना,
क्योंकि जीत का कोई 'विकल्प' नहीं होता...
क्यों डरें ज़िन्दगी में क्या होगा,
हर वक्त क्यों सोचे कि बुरा होगा,
बढते रहे मंजिलों की ओर हम,
कुछ भी ना मिला तो क्या, तजुर्बा तो नया होगा...
अपनी ज़मीन अपना आकाश पैदा कर,
अपने कर्मों से नया इतिहास पैदा कर,
मांगने से मंज़िल नहीं मिलती ए-दोस्त,
अपने हर कदम पे नया विश्वास पैदा कर...
ज़िन्दगी काटने से बेहतर है ज़िन्दगी जीना सीखो,
ज़िन्दगी ज़ीनी है तो मेरा यह पैगाम लिखो,
दुनिया तुम्हारे क़दमों में होगी,
बस मेरे दोस्तों सिकंदर की तरह सोचना सीखो...