Manavta Shayari 3

माया के जाल में मानव इस कदर जकड़ता जा रहा,
खुद नहीं मालूम की वो क्या करता जा रहा,

दूसरों की खुशियाँ छीन-छीन कर ये देखो,
अपने घर की ही खुशियाँ बनाता जा रहा,

बेशरम, निर्लज होकर के ये देखो,
हर गली हर जगह खून की नदियाँ बहाता जा रहा,

मानव के नाम पे कलंक बना ये,
देखिये किस कदर हैवान होता जा रहा...
ये मत देख की कोई गुनहगार कितना है,
ये देख की वो तेरे साथ वफादार कितना है,
ये मत सोच की लोगों से उसको नफरत कितनी है,
पर ये देखो की उसे तुझसे मोहब्बत कितनी है...
एक सच्चा दिल सबके पास होता है,
फिर क्यों नहीं सब पे विश्वास होता है,
इंसान चाहे कितना भी आम हो,
वो किसी ना किसी के लिए जरुर खास होता है...
जरुरी नहीं की जिनमें सांसें नहीं वो मुर्दा है,
जिनमें इंसानियत नहीं, वो भी मुर्दा है..
प्रेम का सागर मन बन जाए, प्रेम ही आँखों में बस जाए,
प्रेम ही बोले, प्रेम को तोलें, प्रेम का सबको पाठ पढ़ाएं,
आज समय की मांग यही है, प्रेम में विश्व ये सारा हो,
मानवता ही धर्म हमारा, मानवता ही नारा हो...
नए दौर, नए युग की शुरुआत,
सत्य, कर्तव्य हो सदा साथ,
बैसाखी का पावन पर्व,
सदैव याद दिलाता रहे मानवता का साथ...