Manavta Shayari 1

कागज़ की कश्ती थी नदी का किनारा था,
खेलने की मस्ती थी दिल ये आवारा था,
कहाँ आ गए इस समझदारी के दलदल में,
वो नादान बचपन भी कितना प्यारा था...
माया के जाल में मानव इस कदर जकड़ता जा रहा,
खुद नहीं मालूम की वो क्या करता जा रहा,

दूसरों की खुशियाँ छीन-छीन कर ये देखो,
अपने घर की ही खुशियाँ बनाता जा रहा,

बेशरम, निर्लज होकर के ये देखो,
हर गली हर जगह खून की नदियाँ बहाता जा रहा,

मानव के नाम पे कलंक बना ये,
देखिये किस कदर हैवान होता जा रहा...
जरुरी नहीं की जिनमें सांसें नहीं वो मुर्दा है,
जिनमें इंसानियत नहीं, वो भी मुर्दा है..
खुशियाँ कम और अरमान बहुत हैं,
जिसे भी देखिये यहाँ हैरान बहुत है,

करीब से देखा तो है रेत का घर,
दूर से मगर शान बहुत है,

कहते हैं सच के साथ कोई नहीं,
आज तो झूठ की आन-बान बहुत है,

मुश्किल से मिलता है शहर में आदमी,
यूँ तो कहने को इंसान बहुत हैं,

तुम शौक से चलो राह-ए-वफ़ा लेकिन,
ज़रा संभल के चलना तूफ़ान बहुत हैं,

वक़्त पे ना पहचाने कोई ये अलग बात है,
वैसे तो शहर में अपनी पहचाने बहुत हैं...
बेजान चीज़ों को बदनाम करने के,
तरीके कितने आसान होते हैं,
लोग सुनते हैं छुप-छुप के बातें,
और कहते हैं कि दीवारों के भी कान होते हैं...
इंसानियत इन्सान को इंसान बना देती है,
लगन हर मुश्किल को आसान बना देती है,
वरना कोन जाता मंदिरों में पूजा करने,
आस्था ही पत्थरों को भगवान बना देती है...
क्या भरोसा है ज़िन्दगी का,
इंसान बुलबुला है पानी का,
जी रहे हैं कपड़े बदल-बदल कर,
एक दिन एक कपड़े में ले जाएंगे कंधे बदल कर...
जन्नत में सबकुछ है मगर मौत नहीं,
धार्मिक किताबों में सब कुछ है मगर झूठ नहीं,
दुनिया में सब कुछ है लेकिन सुकून नहीं,
इंसान में सब कुछ है मगर सब्र नहीं...
गिरना भी अच्छा है, औकात का पता चलता है,
बढ़ते हैं जब हाथ उठाने को, अपनो का पता चलता है,

जिन्हें गुस्सा आता है, वो लोग सच्चे होते हैं,
मैंने झूठों को अक्सर, मुस्कुराते हुए देखा है,

सीख रहा हूँ मैं, अब भी इंसानों को पढ़ने का हुनर,
सुना है चेहरे पर, किताबों से ज्यादा लिखा होता है...
नफरत जहाँ-जहाँ भी फैले, प्रेम की नदी बहाना तुम,
दीन, दुखी, पीड़ित प्राणी की, सेवा कर लाभ उठाना तुम,

भेदभाव की बातें छोड़ो, सबको गले लगाना तुम,
पाप कपट से मुखड़ा फेरो, पुण्य का लाभ उठाना तुम,

हम सब भाई-भाई सारे, नहीं किसी को ठुकराना,
मानवता की सेवा में नित अपना कर्तव्य निभाना...