Manavta Shayari 1

इंसानियत वो एहसास है जो हमें दुनिया में जीना सिखाती है,
नेकी और इमानदारी हो पास तो खुदा तक ले जाती है,
किसी गरीब का सहारा बन जाओ तो लबों पर मुस्कुराती है,
किसी और के दर्द में अपनी आँखों से आंसू बहाती है...
संगीत सुनकर ज्ञान नहीं मिलता,
मंदिर जाकर भगवान नहीं मिलता,
पत्थर तो इसलिए पूजते हैं लोग,
क्योंकि विश्वास के लायक इंसान नहीं मिलता...
बेजान चीज़ों को बदनाम करने के,
तरीके कितने आसान होते हैं,
लोग सुनते हैं छुप-छुप के बातें,
और कहते हैं कि दीवारों के भी कान होते हैं...
मुश्किल है दौर इतना और उम्र थक गई,
अब किससे जाकर पूंछे, मंजिल किधर गई,
इंसानियत मिलेगी, सबने हँसते हुए कहा,
वो तो कब की मर गई...
वक़्त इन्सान को सिखा देता है,
अजब गजब चीज़ें,
फिर क्या नसीब, क्या मुकद्दर,
और क्या हाथ की लकीरें...
कागज़ की कश्ती थी नदी का किनारा था,
खेलने की मस्ती थी दिल ये आवारा था,
कहाँ आ गए इस समझदारी के दलदल में,
वो नादान बचपन भी कितना प्यारा था...
इंसान भी क्या चीज़ है दौलत कमाने के लिए सेहत खो देता है,
सेहत को वापस पाने के लिए वही कमाई हुई दौलत खो देता है,
जीता ऐसे है, जैसे कभी मरेगा ही नहीं,
और मर ऐसे जाता है, जैसे कभी जिया ही नहीं...
एक सच्चा दिल सबके पास होता है,
फिर क्यों नहीं सब पे विश्वास होता है,
इंसान चाहे कितना भी आम हो,
वो किसी ना किसी के लिए जरुर खास होता है...
खुशियाँ कम और अरमान बहुत हैं,
जिसे भी देखिये यहाँ हैरान बहुत है,

करीब से देखा तो है रेत का घर,
दूर से मगर शान बहुत है,

कहते हैं सच के साथ कोई नहीं,
आज तो झूठ की आन-बान बहुत है,

मुश्किल से मिलता है शहर में आदमी,
यूँ तो कहने को इंसान बहुत हैं,

तुम शौक से चलो राह-ए-वफ़ा लेकिन,
ज़रा संभल के चलना तूफ़ान बहुत हैं,

वक़्त पे ना पहचाने कोई ये अलग बात है,
वैसे तो शहर में अपनी पहचाने बहुत हैं...
इंसानियत इन्सान को इंसान बना देती है,
लगन हर मुश्किल को आसान बना देती है,
वरना कोन जाता मंदिरों में पूजा करने,
आस्था ही पत्थरों को भगवान बना देती है...