Judai Shayari 5

सुबह जुदा है, रात जुदा है,
अपनी तो हर बात जुदा है,
तुमसे बिछड़ कर ऐसा लगा,
सब तो आते रहतें हैं,
तुम आओ तो बात जुदा है...
किसी को प्यार इतना देना की हद ना रहे,
पर एतबार भी इतना रखना की शक ना रहे,
वफ़ा इतनी करना की बेवफाई ना हो,
और दुआ बस इतनी करना की जुदाई ना हो...
तुम्हारी जुदाई में यूँ आँसू बहाते रहते हैं,
उम्मीद के दिए आँधियों से बचाए रहते हैं,
चाहत है केवल तुमसे प्यार पाने की,
इस चाहत को ही एक आस बनाए रहते हैं...
गलतियों से जुदा तुम भी नहीं, मैं भी नहीं,
दोनों इंसान हैं खुदा तुम भी नहीं, मैं भी नहीं,

तुम मुझे और मैं तुम्हें इलज़ाम देते हैं मगर,
अपने अन्दर झाँकते तुम भी नहीं, मैं भी नहीं,

गलत फहमियों ने कर दी दोनों में पैदा दूरियाँ,
वरना फितरत का बुरे तुम भी नहीं, मैं भी नहीं...
उनकी तस्वीर को सीने से लगा लेते अगर कोई तस्वीर हमारे पास होती,
इस तरह जुदाई का गम मिटा लेते अगर कोई दवा होती,
किसी तरह मुलाकात हो जाये उनसे तो, शायद कोइ राहत इस दिल को होती...
वो रुखसत हुई तो आँख मिलाकर नहीं गई,
वो क्यों गई, ये बताकर नहीं गई,
लगता है वापस अभी लौट आएगी,
वो जाते हुए चिराग बुझाकर नहीं गई...