Judai Shayari 4

दिल था अमीर, मुक़द्दर गरीब था,
मिलकर बिछड़ना हमारा नसीब था,
चाह कर भी कुछ कर ना सके हम,
घर भी जलता रहा, समुन्दर भी करीब था...
मोहब्बत मुक़द्दर है, एक ख्वाब नहीं,
ये वो रिश्ता है, जिसमें सब कामयाब नहीं,
जिन्हें साथ मिला, उन्हें उँगलियों पे गिन लो,
जिन्हें मिली जुदाई, उनका कोई हिसाब नहीं...
ऐ रब्बा क्या चीज़ मोहब्बत तूने बनाई है,
किसी को ये मिल जाती है और कोई सहता उम्र भर की तन्हाई है,
साथ चलने के ख्वाब देखते हैं जो लोग मोहब्बत में,
कोई पा लेता है अपनी मंजिल को और कोई सहता उम्र भर की जुदाई है...
हर एक चेहरे पे गुमान उसका था,
बसा ना कोई दिल में ये खाली मकान उसका था,
तमाम दुःख मिट गए मेरे दिल से लेकिन,
जो ना मिट सका वो एक नाम उसका था...
दिन है अगर तो रात भी होगी,
बादल छाए हैं तो बरसात भी होगी,
जुदाई का गम मत करना दोस्त,
दूर हैं हम आज तो कल मुलाकात भी होगी...
आपकी जुदाई भी हमें प्यार करती है,
आपकी याद बहुत बेकरार करती है,
जाते-जाते कहीं भी मुलाकात हो जाये आपसे,
तलाश आपको ये नज़र बार-बार करती है...
इश्क वालों की किस्मत बुरी होती है,
हर मुलाकात जुदाई से जुड़ी होती है,
कहीं भी देख लेना आज़माकर,
सच्चे प्यार को जुदाई ही नसीब होती है...
चाहत करके चाहत हम लूटा ना सके,
प्यार करके हम उसे बता ना सके,
ढाई अक्षर में है शक्ति इतनी,
कि जुदा होकर भी उनसे जुदा हो ना सके...
हो जुदाई का सबब कुछ भी मगर,
हम उसे अपनी खता कहते हैं,
वो तो साँसों में डली है मेरे,
जाने क्यूँ लोग उसे मुझसे जुदा कहते हैं...
लोग मिलते हैं,
और फिर एक दुसरे के करीब आते हैं,
और करीब आकार, अक्सर जुदा हो जाते हैं,
अगर किस्मत में जुदा होना लिखा होता है,
तो खुदा ऐसे लोगों से मिलाता क्यूँ है..