Judai Shayari 3

उनकी तस्वीर को सीने से लगा लेते हैं,
इस तरह जुदाई का गम मिटा लेते हैं,
किसी तरह ज़िकर हो जाए उनको तो,
हँसकर भीगी पलकें झुका लेते हैं...
अगर ज़िन्दगी में जुदाई ना होती,
तो कभी किसी की याद आई ना होती,
साथ ही गुज़रता हर लम्हा तो,
शायद रिश्तों में ये गहराई ना होती...
एक उम्र की जुदाई मेरे नसीब करके,
वो तो चला गया है बातें अजीब कर करके,
खुद दूर हो गया है मुझको करीब करके...
काश ये ज़ालिम जुदाई ना होती,
ऐ खुदा तूने ये चीज़ बनाई ना होती,
ना हम उनसे मिलते ना प्यार होता,
वो ज़िन्दगी जो अपनी थी परायी ना होती...
किस्मत पर एतबार किसको है,
मिल जाए खुशी इनकार किसको है,
कुछ मजबूरियाँ हैं मेरी जान..!
वरना जुदाई से प्यार किसको है...
आपका दुःख हम सह नहीं सकते,
क्या करे मजबूर हैं, इसलिए कुछ कह नहीं सकते,
हमारे गिरते आँसू पकड़कर देखो,
वो भी कहते हैं कि हम आपसे जुदा रह नहीं सकते...
तुम्हें देखने के लिए तरसते हैं हम,
तेरी चाहत के लिए तड़पते हैं हम,
क्यूँ चली जाती हो मुझसे दूर,
तुम्हारी जुदाई में रोज़-रोज़ मरते हैं हम...
आपकी याद दिल को बेक़रार करती है,
नज़र तलाश आपको बार-बार करती है,
गिला नहीं जो हम हैं दूर आपसे,
हमारी तो जुदाई भी आपसे प्यार करती है...
जिस-जिस ने मोहब्बत में,
अपने महबूब को खुदा कर दिया,
खुदा ने अपने वजूद को बचाने के लिए,
उनको जुदा कर दिया...
प्यार करने वालों की किस्मत बुरी होती है,
मुलाक़ात जुदाई से जुड़ी होती है,
वक़्त मिले तो प्यार की किताब पढ़ लेना,
हर प्यार करने वाले की कहानी अधूरी होती है...