Intezar Shayari 1

वो कह गए मेरा इंतज़ार मत करना,
मैं कहूँ तो भी मेरा एतबार मत करना,
ये भी कहा उन्हें प्यार नहीं हमसे और,
ये भी कह गए किसी और से प्यार मत करना...
ना दिन का पता ना रात का,
एक जवाब दे रब मेरी बात का,
कितने दिन बीत गए उससे बिछड़े हुए,
ये बता दे कौन-सा दिन रखा है हमारी मुलाकात का...
उससे प्यार हुआ जिसे हम कभी पा न सके,
जिसकी बातों को हम कभी भुला ना सके,
दिल लगाया और लगाकर तोड़ दिया उसने,
जिसे भुलाना चाहा पर हम भुला न सके....
कौन कहता है इश्क में बस इकरार होता है,
कौन कहता है इश्क में बस इनकार होता है,
तन्हाई को तुम बेबसी का नाम ना दो,
क्यूंकि इश्क का दूसरा नाम ही इंतज़ार होता है...
कुछ नशा तेरी बात का है,
कुछ नशा धीमी बरसात का है,
हम तो कब से नशे में डूब जाने को तैयार हैं,
इंतज़ार तो सिर्फ आपकी मुलाक़ात का है...
वफ़ा में अब ये हुनर इख्तिहार करना है,
वो सच कहे ना कहे एतबार करना है,
ये तुझको जाते रहने का शौक कबसे हुआ,
मुझे तो खैर तेरा इंतज़ार करना है...
भले ही राह चलतों का दामन थाम ले,
मगर मेरे प्यार को भी तु पहचान ले,
कितना इंतज़ार किया है तेरे इश्क में,
जरा यह दिल की बेताबी तु जान ले...
वो जानते हैं कि हम उनके इंतज़ार में हैं,
इसलिए शायद वो देर लगा रहे हैं,
वक्त कटता नहीं उनके बिना हमारा,
ये जानते हुए भी हमें सता रहे हैं,
ना जाने क्या मिलता है उन्हें हमें यूँ सता कर,
जो देर से आकर भी वो मुस्करा रहे हैं...
रूठी हुई आँखों में इंतज़ार होता है,
ना चाहते हुए भी हर किसी को प्यार होता है,
जिनके टूटने पर भी उनके सच होने का इंतज़ार होता है...
दिल में इंतज़ार की लकीर छोड़ जायेंगे,
आँखों में यादों की नमी छोड़ जायेंगे,
ढूंढते फिरोगे हमें एक दिन,
जिंदगी में एक यार की कमी छोड़ जायेंगे...