Husn Shayari 3

कातिल तेरी अदाओं ने लूटा है,
मुझे तेरी जफ़ाओं ने लूटा है,
शौक नहीं था मुझे मर-मिटने का,
मुझे तो इन नशीली निगाहों ने लूटा है..
आपके दीदार को निकल आये हैं तारे,
आपकी खुशबू से छा गयी हैं बहारें,
आपके साथ दिखते हैं कुछ ऐसे नज़ारे,
कि छुप-छुप के चाँद भी बस आप ही को निहारे...
किसका चेहरा अब मैं देखूं..?
चाँद भी देखा.. फूल भी देखा..
बादल बिजली.. तितली जुगनूं..
कोई नहीं है ऐसा.. तेरा हुस्न है जैसा...
शरीके-ज़िंदगी तू है मेरी, मैं हूँ साजन तेरा,
ख्यालों में तेरी ख़ुश्बू है चंदन सा बदन तेरा,

अभी भी तेरा हुस्न डालता है मुझको हैरत में,
मुझे दीवाना कर देता है जलवा जानेमन तेरा...
कोई किसी के दर्द में शामिल नहीं है,
हर अदा हुस्न के काबिल नहीं है,
सब कुछ लुटा कर समझ में आया,
ये दुनिया प्यार के काबिल नहीं है...
फ़िज़ाओं का मौसम जाने पर, बहारों का मौसम आया,
गुलाब से गुलाब का रंग तेरे गालों पे आया,
तेरे नैनों ने काली घटा का काजल लगाया,
जवानी जो तुम पर चढ़ी तो नशा मेरी आँखों में आया...
आज इस एक नजर पर मुझे मर जाने दो,
उसने बड़ी मुश्किल से इधर देखा है,
क्या गलत है जो मैं दीवाना हुआ, सच कहना,
मेरे महबूब को तुमने भी अगर देखा है...
दीवाने हैं तेरे नाम के इस बात से इंकार नहीं,
कैसे कहें की हमें तुमसे प्‍यार नहीं,
कुछ तो कसूर है आपकी आँखों का,
हम अकेले तो गुनहगार नहीं...
किसी दामन का क्या भरोसा है,
हमको दुनिया का तजरबा है..

रोशनी हुस्न की पायी जबसे,
दिल की तस्वीर में अंधेरा है..

उतर आया हूं गहरे सागर में,
अब तो आंसू का ही सहारा है..

क्यूं परायों से हम खुशी मांगें,
जब मेरा गम ही मुस्कुराता है...
हुस्न पर जब भी मस्ती छाती है, तब शायरी पर बहार आती है,
पीके महबूब के बदन की शराब, जिंदगी झूम-झूम जाती है...