Gila Shikwa Shayari 5

दिल तोड़कर हमारा तुमको राहत भी ना मिलेगी,
हमारे जैसी तुमको कहीं चाहत भी ना मिलेगी,
यूँ इतनी बेरुखी ना दिखलाइये हमें,
हम अगर रूठे तो हमारी आहट भी न मिलेगी...
खफा भी रहते हैं और वफ़ा भी करते हैं,
इस तरह अपने प्यार को बयान भी करते हैं,
जाने कैसी नाराज़गी है मेरी उनसे,
खोना भी चाहते हैं और पाने की दुआ भी करते हैं...
बात उम्र भर की थी दो पल की नहीं,
बात साथ की थी हालात की नहीं,
जहाँ के मेले में हाथ छोड़ दिया तूने,
बात जुबान की थी किस्मत की नहीं...
इससे पहले की बेवफा हो जायें,
क्यों ना ए दोस्त हम जुदा हो जायें,
तु भी हीरे से बन गया पत्थर,
हम भी कल जाने क्या से क्या हो जायें...
कितना अजीब अपनी ज़िन्दगी का सफ़र निकला,
सारे जहाँ का दर्द अपना मुक़द्दर निकला,
जिसके नाम अपनी ज़िन्दगी का हर लम्हा कर दिया,
अफ़सोस वो हमारी चाहत से बेखबर निकला...
कितना इख्तिहार था उसे अपनी चाहत पर,
जब चाह याद किया, जब चाह भुला दिया,
बहुत अच्छे से जानता है वो मुझे बहलाने के तरीके,
जब चाहा हँसा दिया, जब चाहा रुला दिया...
बंद करली आंखें और लब थरथराए,
आ गए करीब फिर तुम क्यों शरमाए,
दिन में कह लेना जो भी हो गिले-शिकवे,
तुम्हारी खामोश जुबां मुझे रातों को समझाए...
कभी तुम भी हमसे बात कर लिया करो,
मिलने मिलाने की फ़रियाद कर लिया करो,
एक हम हैं जो हर बार शुरुआत करते हैं,
कभी तुम भी हमें हमसे पहले याद कर लिया करो...
रात क्या ढली सितारे चले गए,
गैरों से क्या गिला जब अपने चले गए,
जीत तो सकते थे इश्क की बाज़ी हम भी,
पर तुम्हें जीतने के लिए, हम हारते चले गए...
गिले शिकवे ना दिल से लगा लेना,
कभी मान जाना तो कभी मना लेना,
कल का क्या पता हम हो ना हो,
जब मौका मिले थोड़ा हँस लेना और हँसा देना...