Gila Shikwa Shayari 4

कोई गिला कोई शिकवा ना रहे आपसे,
यह आरजू है कि सिलसिला रहे आपसे,
बस इस बात कि उम्मीद है आपसे,
खफा ना होना अगर हम खफा रहें आपसे...
सिर्फ नज़दीकियों से मोहब्बत हुआ नहीं करती,
फासले जो दिलों में हो तो फिर चाहत हुआ नहीं करती,
अगर नाराज हो.. खफ़ा हो.. तो शिकायत करो हमसे,
खामोश रहने से दिलों की दूरियां मिटा नहीं करतीं...
तरसते थे जो हमसे मिलने को कभी,
ना जाने क्यों आज हमारे साये से भी कतराते हैं,
हम भी वही हैं यह दिल भी वही है,
ना जाने फिर क्यों हमें देख वो रास्ता बदल जाते हैं...
इस कदर हम यार को मनाने निकले,
उसकी चाहत के हम दीवाने निकले,
जब भी उसे दिल का हाल बताना चाहा,
तो उसके होठों से वक्त न होने के बहाने निकले...
हमारी रूह में ना समाये होते तो भूल जाते तुम्हें,
इतना करीब ना आये होते तो भूल जाते तुम्हें,
ये कहते हुए की मेरा ताल्लुक नहीं तुमसे कोई,
आँखों में आँसू ना आये होते तो भूल जाते तुम्हें...
सहोलियाँ छोड़ दी उसने, अब के..
हर रंग में उदासी गुलटी जा रही है,
उस रूठने वाले से कहो देखले आकर,
वो पागल लड़की अब सुधरती जा रही है...
शायद उनकी अदा है ये जो हर दिन हमें तड़पाते हैं वो,
कभी किसी तो कभी किसी बहाने से हमें सताते हैं वो,
ना जाने क्या मिलता है उन्हें जो हमपे यह सितम ढाते हैं वो,
चैन ही नहीं मिलता उन्हें जब तक हमें रुलाते नहीं हैं वो...
हर एक चेहरे को ज़ख्मों का आइना ना कहो,
ये ज़िन्दगी तो है रहमत इसे सजा ना कहो,
ना जाने कौन सी मजबूरीयों का कैदी हो,
वो साथ छोड़ गया है तो बेवफा ना कहो...
उनसे मिलने को जो सोचूं अब वो जमाना नहीं,
घर भी कैसे जाऊ अब तो कोई बहाना नहीं,
मुझे याद रखना कहीं तुम भुला ना देना,
माना की बरसों से तेरी गली में आना जाना नहीं...
मैं शिकायत क्या करूँ अब,
ये तो किस्मत की बात है,
तेरी सोच में भी मैं नहीं,
मुझे लफ्ज़-लफ्ज़ तु याद है...