Gila Shikwa Shayari 2

मेरे आँसू अगर बहते हैं तो बहने दे,
मेरे हिस्से की खुशियाँ तू रहने दे,
मेरे साथ प्यार मोहब्बत की बातें कर,
अपने सभी गिले-शिकवे रहने दे...
पलकों से आँखों की हिफाज़त होती है,
धड़कन दिल की अमानत होती है,
हमारा रिश्ता भी बड़ा प्यारा है,
कभी चाहत तो कभी शिकायत होती है...
बड़ी अच्छी हंसी थी कभी हमारी,
मगर जब से हम उनके जाल में फसने लगे हैं,
उनसे शर्माने का ये आलम है,
की अब हम अटक-अटक के हँसने लगे हैं...
नफरत भी है तुमसे, मोहब्बत भी है तुमसे,
पर मेरी मोहब्बत नफरत पे हावी हो जाती है,
तुमसे दूर जाने की मेरी हर कोशिश,
ना जाने क्यों मुझे तेरे और करीब ले आती है...
वो मोहब्बत भी तेरी थी, वो नफरत भी तेरी थी,
वो अपनापन और ठुकराने की अदा भी तेरी थी,
हम अपनी वफ़ा का इंसाफ किस्से माँगते,
वो शहर भी तेरा था और अदालत भी तेरी थी...
तुम्हारी हर एक बात बेवफाई की कहानी है,
लेकिन तेरी हर साँस मेरी ज़िन्दगी की निशानी है,
तुम आजतक नहीं समझ सके मेरे प्यार को,
इसलिए मेरे आँसू भी तेरे लिए पानी हैं...
क्यों मोहब्बत इनती मजबूर होती है,
इंसान को ज़लील करवाती है,

खुद को खुद से दूर करती है,
ना किसी का यार, भाई ना किसी का बेटा बने रहने देती है,

हर रिश्ता ये बरबाद करती है,
आखिर मोहब्बत क्यूँ इतनी मजबूर होती है...
मैं खफा नहीं हूँ जरा उसे बता देना,
आता-जाता रहे यहाँ इतना समझा देना,

मैं उसके ग़म में शरीक हूँ,
पर मेरा ग़म ना उसे बता देना,

ज़िन्दगी कागज़ की कश्ती सही,
शक में ना बहा देना...
या रब गम-ऐ-हिजरां में इतना तो किया होता,
जो हाथ जिगर पर है वो दस्त-ऐ-दुआ होता,

एक इश्क का गम आफत और उस पे ये दिल आफात,
या गम ना दिया होता, या दिल ना दिया होता,

गैरों से कहा तुमने, गैरों से सुना तुमने,
कुछ हमसे कहा होता, कुछ हमसे सुना होता...
हर पल उनके बारे में सोचते हैं,
कभी खुद को कभी खुदा को कोसते हैं,
जब उनका भी दिल चाहता है हमसे मिलना,
फिर क्यों वो अपने क़दमों को रोकते हैं...