Gam Shayari 3

काश कोई हम पर प्यार जताता,
हमारी आंखों को अपने होंठों से छुपाता,
हम जब पूछते कौन हो तुम,
मुस्कुरा कर वो अपने आपको हमारी जान बताता...
चुप रहके ही जिंदगी का गम खाता रहा,
हमसे हर बात वो जालिम छुपाता रहा..

मुझे खबर ना हुई कि वो रोता है बहुत,
जब भी मिला वो मुझको यूं हंसाता रहा..

सर्द आंखों में जाने वो कितने दुख लिए,
आग को अपने दिल में ही दबाता रहा..

कितना अजीब था वो मेरा नादां नाखुदा,
अपनी कश्ती को जो रेत पर चलाता रहा...
हमें कोई गम नहीं था गम-ए-आशिकी से पहले,
ना थी दुश्मनी किसी से तेरी दोस्ती से पहले,
है ये मेरी बदनसीबी तुम्हारा क्या कुसूर इसमें,
तुम्हारे गम ने मार डाला मुझे जिंदगी से पहले...
ना मिलता गम तो बरबादी के अफ़साने कहाँ जाते,
दुनिया अगर होती चमन तो वीराने कहाँ जाते,
चलो अच्छा हुआ अपनों में कोई गैर तो निकला,
सभी अगर होते अपने तो बेगाने कहाँ जाते...
गम है कि तुम्हें अपने प्यार का एहसास करा ना सके,
तुम रूठ ना जाओ यह सोच के तुम्हें मना ना सके,
तुम गैर के ना हो जाओ किसी मोड़ पे,
इस डर से कभी तुम्हें अपना ना सके...
आँखें खोलूं तो चेहरा तुम्हारा हो,
बंद करूँ तो सपना तुम्हारा हो,
मर भी जाऊं तो कोई गम नहीं,
अगर कफ़न के बदले आंचल तुम्हारा हो...
गम कभी ख़त्म नहीं होता,
ये बताने से भी कम नहीं होता,
ये तो हमसफ़र है उन तनहा दिलों का,
जिसके साथ उनका हमदम नहीं होता...
ज़ुबा अगर अश्कों की समझो तो,
ये सब कुछ कह जाते हैं यारो,
दिल के बोझ को करते हैं हल्का,
खुद सबके गम सह जाते हैं यारो...
गम के दरियाओं से मिलकर बना है ये सागर,
आप क्यों इसमें समाने की कोशिश करते हो,
कुछ नहीं है और इस जीवन में ग़म के सिवा,
आप क्यों इस ज़िन्दगी में आने की कोशिश करते हो...
मेरी ज़िन्दगी ग़मों से हो गयी है तार,
खुशियाँ भी मेरे करीब नहीं आतीं,
ज़माने भर का ज़हर पी लिया हमने,
जान है कि कमभख्त.. निकल नहीं जाती...