Dua Shayari 4

ये भी एक दुआ है खुदा से,
किसी का दिल ना दुखे हमारी वजह से,
ऐ खुदा कर दे कुछ ऐसी इनायात हम पे,
कि खुशियाँ ही मिलें सबको हमारी वजह से...
खुसबू मांगी थी रब से,
वो हमें लाजवाब फूल थमा गए,
थोड़ी ख़ुशी मांगी थी दुआ में,
वो हमें आपसे मिलाकर.. सबसे खुश नशीब बना गए...
मंजिल भी खो चुके, हमसफ़र भी नहीं रहा,
मेरी किसी भी दुआ में शायद असर ही नहीं रहा,
जबसे हुई है दिल को खबर की वो बिछड़ रहा है मुझसे,
लफ़्ज़ों को जोड़ने का तबसे हुनर भी नहीं रहा...
मीलों के फासलों में भी दूरी ना हो,
बात ना हो, ऐसी मज़बूरी ना हो,
मेरी तमन्ना है हम दोस्त रहें उम्र भर,
आप भी दुआ करना की ये दुआ मेरी अधूरी ना हो...
ना कोई राह आसान चाहिए,
ना ही हमें कोई पहचान चाहिए,
एक ही चीज़ मांगते हैं रोज़ दुआ में,
अपनों के चेहरे पर हर पल प्यारी सी मुस्कान चाहिए...
कोई समझे ना हमको बेशक पर आप तो समझते हैं,
अपना बनाते हैं मेरे हर गम को तभी तो हम संभलते हैं,
खुदा हर एक ख़ुशी दे आपको, हर एक गम हमको नसीब हो,
बस यही दिल में सोचकर हर एक दुआ करते हैं...
खुदा से मैंने एक दुआ मांगी,
दुआ में मैंने अपनी मौत मांगी,
फिर खुदा ने कहा, मौत तो तुझे दे दूँ,
पर उसको क्या कहूँ, जिसने तेरी लम्बी उम्र मांगी...
आखें देखती हैं राह उनके लौट आने की,
बहुत खूब सजा मिली हमको दिल लगाने की,
पहले तो दुआ करते थे उन्हें पाने को,
आज कल दुआ करते हैं उन्हें भूल जाने की...
हर यादों में उसी की याद रहती है,
मेरी आँखों को उसी की तलाश रहती है,
कुछ तुम भी दुआ करो यारों,
दोस्तों की दुआ में फरिश्तों की फरियाद होती है...
हर ख़ुशी, ख़ुशी मांगे आपसे,
हर ज़िन्दगी, ज़िन्दगी मांगे आपसे,
उजाला ही उजाला हो मुकद्दर में आपके,
की सूरज भी रौशनी मांगे आपसे...