Dosti Shayari 18

ऐ-दोस्त तुम्हें भूल जाने का हौसला ना हुआ,
दूर रहकर भी तू जुदा ना हुआ,
तुझसे मिलकर किसी और से क्या मिलते,
कोई तेरे जैसा दूसरा ना हुआ...
हर तरह के इलज़ाम को सह लेते हैं,
ज़िन्दगी को यूँही जी लेते हैं,
मिला लेते हैं जिनसे हाथ दोस्ती का,
उन हाथों से फिर, ज़हर भी पी लेते हैं...
तुम्हारी उल्फत को कभी नाकाम ना होने देंगे,
तुम्हारी दोस्ती को कभी बदनाम ना होने देंगे,
मेरी ज़िन्दगी में सूरज निकले ना निकले,
तुम्हारी ज़िन्दगी में कभी शाम होने ना देंगे...
अनजान फ़रिश्ते जिंदगी बदल जाते हैं,
नम आँखों में ख़ुशियों की लड़ी बन जाते हैं,
खून के रिश्तों से भी जो ख़ास बन जाते हैं,
वही अजनबी तो अजीज़ दोस्त बन जाते हैं...
जैसे होता है आँखों और पलकों का रिश्ता,
वैसा ही होता है दोस्त जीवन में फ़रिश्ता,

राहें कितनी ही गहरा जाए,
एक साथ हमेशा हाथ देता है,

दुनियाँ कितनी भी बेवफा हो जाए,
दोस्त परछाई की तरह साथ होता हैं...