Dil Se Shayari 5

ये आरज़ू थी कि ऐसा भी कुछ हुआ होता,
मेरी कमी ने तुझे भी रुला दिया होता,
मैं लौट आता तेरे पास एक लम्हें में,
तेरे लबों ने मेरा नाम तो लिया होता...
दिल का सूनापन मुझे अकेलेपन का एहसास दिलाता है,
मेरा अकेलापन हर पल मेरी आँखों को रुलाता है,
दुआ है रब से कोई तो हमसफर मिले,
जो कहे हमें तो बस आपकी यादों के सहारे जीना आता है...
अपना हमसफ़र बना ले मुझे,
तेरा ही साया हूँ अपना ले मुझे,
ये रात का सफ़र और भी हंसी हो जाएगा,
तू आ जा मेरे सपनों में या बुला ले मुझे...
तस्वीर तेरी दिल मेरा बहला ना सकेगी,
ये तेरी तरह मुझसे तो शर्मा ना सकेगी,
मैं बात करूँगा तो ये खामोश रहेगी,
सीने से लगा लूँगा तो ये कुछ ना कहेगी,
आराम वो क्या देगी जो तड़पा ना सकेगी,
परछाई तो इंसान के काम आ ना सकेगी,
इन होंठों को मैं कुछ दे ना सकूँगा,
इन ज़ुल्फों को भी मैं हाथ में ले ना सकूँगा,
उलझी हुई रातों को ये सुलझा ना सकेगी...
अब की बारिश हो और मेरी एक चुटकी धूल ना पाओगी,
सावन भी चाहे तो तुम तन्हा झूल ना पाओगी,
हम तुमसे हैं दूर गए, पर इतना दावा अपना है,
नए रिवाजों में पड़कर भी तुम हमको भूल ना पाओगी...
मेरी हसरतें मचल गयी,
जब तुमने पूछा दिल से,
अंजाम-ए-दीवानगी क्या होगी,
जब तुम मिलोगे मुझे उम्र भर के लिए...
खता हो गई तो सजा बता दो,
दिल में इतना दर्द क्यों है वजह बता दो,
देर हो गई है याद करने में ज़रुर,
लेकिन तुमको भुला देंगे ये ख्याल दिल से मिटा दो...
अदा लबों से दिल की बात हो जाने दो,
कबूल आज दिल की इबादत जाने दो,
तनहा चल रहे हो दस्त-ए-जीस्त में,
दो पल मुझको ज़रा साथ हो जाने दो...
मंजिलों से अपनी कभी डर ना जाना,
रास्ते की परेशानियों से कहीं टूट ना जाना,
जब भी ज़रूरत हो ज़िन्दगी में किसी अपने की,
हम आपके अपने ही हैं ये भूल ना जाना...
हर बार दिल से ये पैगाम आए,
जुबान खोलूं तो तेरा ही नाम आए,
तुम ही क्यों भाए दिल को क्या मालूम,
जब नज़रों के सामने हसीन तमाम आए...