Dil Se Shayari 4

उनके दीदार के लिए दिल तड़पता है,
उनके इंतज़ार में दिल तरसता है,
क्या कहें इस कमबख्त दिल को,
जो अपना होकर भी किसी और के लिए धड़कता है...
यूँ महफ़िल नहीं होती और नजारे नहीं होते,
यूँ चाँद के पहलू में सितारे नहीं होते,
हम इसलिए करते हैं आपकी फ़िक्र,
क्योंकि दिल के करीब सारे नहीं होते...
आजकल क्यों मेरा वक़्त कटता नहीं,
कोई चेहरा नज़रों से हटता नहीं,
क्यों हैं बेताबियाँ मैंने ना जाना था,
शायद पहले ये दिल दीवाना था नहीं...
कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है,
मगर धरती की बैचनी को बस बादल समझता है,
मैं तुमसे दूर कैसा हूँ, तुम मुझसे दूर कैसी हो,
ये तुम्हारा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है...
याद उसे करो जो अच्छा लगे,
प्यार उसे करो जो सच्चा लगे,
साथ उसका दो जो इरादों का पक्का लगे,
और दिल उसे दो जो सूरत से नहीं दिल से सच्चा लगे...
अपनी दास्ताँ वो मुझे रोज़ सुनाती है,
मिलने देर से आने के, बहाने वो रोज़ बनाती है,
पता है मुझे, की वो जूठ का सहारा लेती है,
लेकिन मुझे मनाने की हर मुमकिन कोशिश वो करती है...
दिल से मेरे याद जाती नहीं उनकी,
बड़ी सुहानी है दिल की बात उनकी,

किसी पर्वत से बदली ले आओ,
फिर देखना अंगड़ाई उनकी,

मैं अदाओं की चर्चा कैसे करूँ,
शब्दों से अलग है हर अदा उनकी,

इस रहनुमा से ना टूटे रिश्ता मेरा,
खुशबू लगती है सोंधी-सोंधी उनकी...
तेरी याद दिल से जाती नहीं,
सुबह मेरी रातों में आती नहीं,
क्यों मोहब्बत का हश्र होता है ऐसा,
जिसको चाहा जान से ज्यादा, वो ज़िन्दगी में आती नहीं...
उनसे रोज़ मिलने को दिल करता है,
कुछ सुनने सुनाने को दिल करता है,
किसी के मनाने का अंदाज़ ऐसा है,
रोज़ रूठ जाने को दिल करता है...
चेहरे पे फिदा तो हर कोई होता है,
दिल पे फिदा हो के तो देखिए,
जान लुटाने की बात तो सब करते हैं,
दिल से कभी अपना मान के तो देखिए...