Dil Se Shayari 3

करीब से तुम्हें देखा तो अपना पाया,
जब तुम्हें दोस्ती में आजमाया तो अपना पाया,
तुम्हें क्या नाम दूँ समझ में नहीं आया,
दोस्ती, प्यार, ज़िन्दगी या अपना साया...
करवटों में गुज़र जाती है सारी रात,
मोहब्बत क्या चीज़ है मैंने जान लिया,

ख्वाब आँखों से कभी ना दूर हों,
पहली नज़र की मोहब्बत को पहचान लिया,

तुम्हें देख के दिल धड़कता है मेरा,
मैंने तुमको अपना मान लिया...
अपनापन भी इस बैगाने पन में है,
पूरा आलम एक दीवाने पन में है,
ये जो तुमसे में अनजान बना फिरता हूँ,
सारी बात इसी अनजाने पन में है...
बसा है आँखों में आपका चेहरा इस तरह,
गुलाबब में खुशबू बसी होती है जिस तरह,
नमाज़ पढ़ लीया हो और दुआ ना मांगी हो,
आपकी कमी महसूस होती है कुछ इस तरह...
अपना दिल अपनी तबाही का सबक होता है,
ये जवानी का आलम ही अजब होता है,
कौनसी बात ने किसका दिल तोड़ दिया,
बोलने वाले को एहसास ही कब होता है...
नाम-ए-मोहब्बत से खुशबू-ए-वफा आती है,
मेरे दिल से तुम्हारी धड़कन की सदा आती है,
जब भी करते हो याद हमें दिल से,
यूँ लगता है जैसे जन्नत से हवा आती है...
दिल से दिल की दूरी नहीं होती,
काश कोई मज़बूरी नहीं होती,
मिलने की तमन्ना तो बहुत है,
लेकिन कहते हैं हर तमन्ना पूरी नहीं होती...
दूर ना जाया करो दिल तड़प जाता है,
आपके ही ख्याल में दिन गुज़र जाता है,
आज पूंछा है दिल ने एक सवाल हमसे,
दूर रहकर आपको भी क्या हमारा ख्याल आता है...
ये कसक दिल की दिल में चुभी रह गई, ज़िन्दगी में तुम्हारी कमी रह गई,
एक मैं, एक तुम, एक दीवार थी, ज़िन्दगी आधी-आधी बटी रह गई,
रात में भीगे पत्तों की तरह, मेरी पलकों पे थोड़ी नमी रह गई,
मैंने रोका नहीं वो चला भी गया, बेबसी दूर तक देखती रह गई,
मेरे घर की तरफ धूप की पीठ थी, आते-आते इधर चाँदनी रह गई...
दिल ने किया मजबूर कुछ इस तरह की,
ख़्वाबों में भी तुम आने लगे,
रात तो काटे नहीं कटती थी और अब तो,
धड़कनों में भी तुम समाने लगे...