Dard Shayari 21

प्यार क्या होता है हम नहीं जानते,
ज़िन्दगी को हम अपना नहीं मानते,
गम इतने मिले की एहसास नहीं होता,
कोई हमसे प्यार करे विश्वास नहीं होता...
टूटे ख्वाबों को फिर सजाना आता है,
रूठे दिल को मनाना आता है,
आप हमारे गम को देखकर परेशान ना हों,
हमें तो दर्द में भी मुस्कुराना आता है...
ना किसी की आँख का नूर हूँ, ना किसी के दिल का करार हूँ,
किसी के काम ना आ सके, मैं वो एक मुश्त-ए-गुबार हूँ,

मेरा रंग-रूप बिगड़ गया, मेरा यार मुझसे बिछड़ गया,
जो चमन फिज़ा से उजड़ गया, मैं उसी की फ़सल-ऐ-बहार हूँ...
इतनी बड़ी दुनिया में कोई सहारा नहीं,
अपनों की भीड़ में कोई हमारा नहीं,
कदम लड़खड़ाए तो उनका दामन थाम लिया,
वो भी हंसकर बोले दोस्त ये दामन तुम्हारा नहीं...
काश ये दिल शीशे का बना होता,
चोट लगती तो बेशक ये फनाह होता,
पर सुनते जब वो आवाज़ इसके टूटने की,
तब उन्हें भी अपने गुनाह का एहसास होता...
मेरे दिल के टुकड़ों से आवाज़ निकलती है,
हर पल दिल के जनाज़े की बरात निकलती है,
उस बेरहम को जरा भी रहम नहीं आता,
और तेरी हालत पे तो पत्थरों से भी धार निकलती है...
कलम चलती है तो दिल की आवाज़ लिखता हूँ,
गम और जुदाई के अंदाज़-ए-बयाँ लिखता हूँ,
रुकते नहीं हैं मेरी आँखों से आंसू,
मैं जब भी उसकी याद में अलफ़ाज़ लिखता हूँ...
फूलों में भी कांटे होते हैं,
प्यार करने वाले अक्सार रोते हैं,
तड़पते हैं दीवाने तमाम उम्र,
और तड़पाने वाले चैन से सोते हैं...
हाथों में मेहंदी सजाके बैठे हैं,
दिल का दर्द छुपाके बैठे हैं,
पता है वो लौटके आएँगे नहीं, फिर भी,
उसके आने की राहों को हम फूलों से सजाके बैठे हैं...
दरिया वफाओं का कभी रुकता नहीं,
प्यार में इंसान कभी झुकता नहीं,
खामोश हो जाते हैं उनकी ख़ुशी के लिए,
और वो समझते हैं हमारा दिल कभी दुखता नहीं...