Dard Shayari 1

फासले इतने तो ना हुए करते थे,
मैं वही हूँ जिसे तुम अपना कहा करते थे,
तुम अगर भूल गए हमको तो कोई बात नहीं,
ज़ख्म तो पहले भी इस दिल पे लगा करते थे...
हर उदासी दिल पर छाई हुई,
हर खुशी है मुझसे घबराई हुई,
और क्या रखा है ज़िन्दगी के दामन में,
चंद कलियाँ हैं वो भी मुरझाई हुई...
अपनी तकदीर में तो कुछ ऐसे ही सिलसिले लिखे हैं,
किसी ने वक्त गुजारने के लिए अपना बना लिया,
तो किसी ने अपना बनाकर वक्त गुजार लिया...
रुला गई आज वो आँखें फिर मुझे,
दर्द में डूबा एक शख्स नज़र आ गया,
मैं तो हंसके हर गम भुला देता था,
वो मेरी हंसी को ही चुरा गया...
गुस्ताखी ये है हमारी,
हर किसी से रिश्ता जोड़ लेते हैं,
लोग कहते हैं मेरा दिल पत्थर का है,
लेकिन... ए दोस्त...
कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इसे भी तोड़ देते हैं...
प्यार जब मिलता नहीं तो होता क्यों है,
अगर ख्वाबों में वो आये तो इंसान सोता क्यों है,
जब यही प्यार आँखों के सामने किसी और का हो जाये,
तो दिल इतना रोता क्यों है...
अभी सूरज नहीं डूबा जरा सी शाम होने दो,
मैं खुद लौट जाऊंगा मुझे नाकाम होने दो,
मुझे बदनाम करने का बहाना ढूंढते हो क्यों,
मैं खुद हो जाऊंगा बदनाम पहले नाम होने दो...
प्यार उसको मिलता है जिसकी तकदीर होती है,
बहुत कम हाथों में ये लकीर होती है,
कभी जुदा ना हो प्यार किसी का,
कसम खुदा की बहुत तकलीफ होती है...
साथी ऐसा मिला जो साथ ना दे सका,
निगाहें ऐसी मिली जो रो भी ना सकी,
हँसना तो चाहते थे हम हर दम पर क्या करें,
मुस्कान ही ऐसी मिली जो होंठों पे ना आ सकी...
एक दिल और लाख समझाने वाले,
अगर समझ ना आए तो क्या करें,
दर्द दिल का हो तो सह लें,
जब दिल ही दर्द बन जाए तो क्या करें...