Dard Shayari 1

वो रात दर्द और सितम की रात होगी,
जिस रात रुखसत उनकी बारात होगी,
उठ जाता हूँ मैं ये सोचकर नींद से अक्सर,
कि एक गैर की बाहों में मेरी सारी कायनात होगी...
दर्द देते हो और खुद ही सवाल करते हो,
तुम भी ओ सनम कमाल करते हो,
देख कर पूंछ लिया है हाल मेरा,
चलो शुक्र है कुछ तो ख्याल करते हो...
वो रोए तो बहुत, पर मुँह मोड़कर रोए,
कोई तो मजबूरी होगी, जो दिल तोड़कर रोए,
मेरे सामने कर दिए मेरी तस्वीर के टुकड़े,
पता चला मेरे पीछे वो उन्हें जोड़कर रोए...
हर उदासी दिल पर छाई हुई,
हर खुशी है मुझसे घबराई हुई,
और क्या रखा है ज़िन्दगी के दामन में,
चंद कलियाँ हैं वो भी मुरझाई हुई...
कितनी आसानी से कह दिया तुमने,
की बस अब तुम मुझे भूल जाओ,
साफ़-साफ़ लफ़्ज़ों में कह दिया होता,
की बहुत जी लिए तुम अब मर जाओ...
अभी सूरज नहीं डूबा जरा सी शाम होने दो,
मैं खुद लौट जाऊंगा मुझे नाकाम होने दो,
मुझे बदनाम करने का बहाना ढूंढते हो क्यों,
मैं खुद हो जाऊंगा बदनाम पहले नाम होने दो...
फासले इतने तो ना हुए करते थे,
मैं वही हूँ जिसे तुम अपना कहा करते थे,
तुम अगर भूल गए हमको तो कोई बात नहीं,
ज़ख्म तो पहले भी इस दिल पे लगा करते थे...
अपनी तकदीर में तो कुछ ऐसे ही सिलसिले लिखे हैं,
किसी ने वक्त गुजारने के लिए अपना बना लिया,
तो किसी ने अपना बनाकर वक्त गुजार लिया...
रुला गई आज वो आँखें फिर मुझे,
दर्द में डूबा एक शख्स नज़र आ गया,
मैं तो हंसके हर गम भुला देता था,
वो मेरी हंसी को ही चुरा गया...
कितने दूर निकल गए,
रिश्ते निभाते निभाते,
खुद को खो दिया हमने,
अपनों को पाते पाते,
लोग कहते हैं हम मुस्कराते बहुत हैं,
और हम थक गए,
दर्द छुपाते छुपाते...