Dard Shayari 1

कितनी आसानी से कह दिया तुमने,
की बस अब तुम मुझे भूल जाओ,
साफ़-साफ़ लफ़्ज़ों में कह दिया होता,
की बहुत जी लिए तुम अब मर जाओ...
कदम युहीं डगमगा गए रास्तें में वरना,
संभलना हम भी जानते थे,
ठोकर भी लगी तो उस पत्थर से,
जिसे हम अपना मानते थे...
फासले इतने तो ना हुए करते थे,
मैं वही हूँ जिसे तुम अपना कहा करते थे,
तुम अगर भूल गए हमको तो कोई बात नहीं,
ज़ख्म तो पहले भी इस दिल पे लगा करते थे...
अपनी तकदीर में तो कुछ ऐसे ही सिलसिले लिखे हैं,
किसी ने वक्त गुजारने के लिए अपना बना लिया,
तो किसी ने अपना बनाकर वक्त गुजार लिया...
पलकों में आसूं और दिल में दर्द सोया है,
हँसने वालों को क्या पता रोने वाला किस कदर रोया है,
मेरी तन्हाई का आलम तो बस वोही जान सकता है,
जिसने ज़िन्दगी में किसी को पाने से पहले खोया है...
हर उदासी दिल पर छाई हुई,
हर खुशी है मुझसे घबराई हुई,
और क्या रखा है ज़िन्दगी के दामन में,
चंद कलियाँ हैं वो भी मुरझाई हुई...
प्यार जब मिलता नहीं तो होता क्यों है,
अगर ख्वाबों में वो आये तो इंसान सोता क्यों है,
जब यही प्यार आँखों के सामने किसी और का हो जाये,
तो दिल इतना रोता क्यों है...
अभी सूरज नहीं डूबा जरा सी शाम होने दो,
मैं खुद लौट जाऊंगा मुझे नाकाम होने दो,
मुझे बदनाम करने का बहाना ढूंढते हो क्यों,
मैं खुद हो जाऊंगा बदनाम पहले नाम होने दो...
रुला गई आज वो आँखें फिर मुझे,
दर्द में डूबा एक शख्स नज़र आ गया,
मैं तो हंसके हर गम भुला देता था,
वो मेरी हंसी को ही चुरा गया...
एक दिल और लाख समझाने वाले,
अगर समझ ना आए तो क्या करें,
दर्द दिल का हो तो सह लें,
जब दिल ही दर्द बन जाए तो क्या करें...