Chand Sitare Shayari 4

ऐ चाँद, दे इतनी रौशनी की कदम संभल जाए,
ऐ सितारे जगमगा तू इतना की सफ़र बहल जाए,

अंधेरो के राही हम लड़खड़ा जाते हैं अक्सर,
ज़र्रा-ज़र्रा चमके जमीन का ऐसे सब बदल जाए,

देख तू है हमसफ़र मेरी हर खामोश रातों का,
देना तब गवाही तू जब मेरा दम निकल जाए,

हिज्र की रातों में है उजाले की उम्मीद हमें,
रोशन हो दिल अपना, कुछ पल शमा जल जाए,

बदनसीबी की गिरफ्त में एक शमा नसीब की,
परवाने की क्या खता, फितरत है की जल जाए...
ऐ चाँद तू अपनी चांदनी पे ना ज्यादा नाज़ कर,
यूं इतरा के ना तू खुद पे गुमान कर,

यूं करीब है तेरी चांदनी तो यूं ना हंस के मेरा मज़ाक कर..

कभी मेरा चाँद भी मेरे पास होगा,
तू ज़रा रुक हमारा साथ होने का इंतज़ार कर...
आ तेरी उम्र मैं लिख दूँ चाँद सितारों से,
तेरा जन्म दिन मैं मनाऊं फूलों से, बहारों से,
हर एक खूबसूरती दुनियां से मैं ले आऊं,
सजाऊं यह महफ़िल मैं हर हसीन नजारों से...
रीती रिवाज़ के दल-दल में हम फना हो गए,
समाझ के बोझ तले हम तबाह हो गए,
ए चाँद तू ही ख्याल रखना उसका,
बिन कहे ही वो हमसे जुदा हो गए...
जिस दिन आप जमी पर आए,
वो आसमा भी खूब रोया था,
आखिर उसके आंसू थमते भी कैसे,
उसने हमारे लिए अपना सबसे प्यारा सितारा जो खोया था...
चाँद तारो की कसम खाता हूँ,
मैं बहारों की कसम खाता हूँ,
कोई आप जैसा नज़र नहीं आया,
मैं नजारों की कसम खाता हूँ...
तू नहीं तो ये नज़ारा भी बुरा लगता है,
चाँद के पास सितारा भी बुरा लगता है,
ला के जिस रोज़ से छोड़ा है तुने भवँर में मुझको,
मुझको दरिया का किनारा भी बुरा लगता है...
काश की तू चाँद और मैं सितारा होता,
आसमान में एक आशियाना हमारा होता,
लोग तुम्हें दूर से देखते,
नज़दीक से देखने का हक़ बस हमारा होता...