Bewafa Shayari 7

हम उनकी याद में बरसो रोते रहे,
बेवफा वो निकले बदनाम हम होते रहे,
प्यार में मदहोशी का आलम तो देखिये,
धूल चेहरे पे थी और हम आइना धोते रहे...
किसी ने हमसे पूछा सिगरेट क्या है,
लोग इसे क्यों पीते हैं,
क्या ये प्यास बुझाती है,
पलट कर हमने कहा,
दिल में एक बेवफा की तस्वीर है,
ये धीरे-धीरे उसे जलाती है...
चाहा था हमने जिसे उसे भुलाया ना गया,
ज़ख्म दिल का लोगों से छुपाया ना गया,
बेवफाई के बाद भी इतना प्यार किया है कि,
बेवफा का इलज़ाम भी उस पर लगाया ना गया...
कैसे वो लौट आए की फुर्सत उसे नहीं,
दुनिया समझ रही है मोहब्बत उसे नहीं,

लगता है आ चुकी है कमी उसकी चाह में,
काफी दिनों से मुझसे शिकायत उसे नहीं,

दिल की ज़मी उसकी है बंजर इसीलिए,
जज्बों की बारिशों की जो आदत उसे नहीं...
प्यार किया तो बदनाम हो गए,
चर्चे हमारे सर-ए-आम हो गए,
ज़ालिम ने दिल भी उसी वक़्त तोड़ा,
जब हम उसके प्यार के गुलाम हो गए...
दिल से मोहब्बत का अजीब कारोबार हमने किया,
वो बे-वफा सही मगर प्यार हमने किया,
अगर वो छोड़ गया तो मत कहो बुरा उसको,
कसूर उसका नहीं ऐतबार हमने किया...
दुनिया में गम बेहिसाब मिले,
बेजान से कितने ख्वाब मिले,

रहने दो वो थे नहीं हमारे,
मगर खाने को ठोकर बेहिसाब मिले,

अगर मिला भी बहारों का चमन,
तो काँटों से लिपटे गुलाब मिले,

रोज़ धड़कती हुई दास्ताँ मिली,
जहाँ मिले दिल-ऐ-बेताब मिले,

सहते हुए एक जमाना गुज़रा,
जो हमसफ़र मिले बेवफा मिले...
वफा की आग में जो खुद को जला देता,
उनसे मोहब्बत का मैं रिश्ता निभा देता,

आज अगर उनकी गलियों में जाता तो,
उनकी यादों को आखिर जवाब क्या देता,

खंजर उतारती थी तन्हाई जिस दिल में,
अगर मुझे कहते हाँ, तो खुद को मिटा देता,

बंज़र पड़ी है मोहब्बत की धरती भी, ऐ सनम,
काश चले जाने के बाद, उनको भुला देता,

बेवफा ने अगर एक मोका दिया होता,
ज़माने को भी मैं मोहब्बत सिखा देता...
कोई अगर अपना हो तो,
उसकी मुस्कराहट भी मजा देती है,
एक बेवफा की मुस्कराहट यारों,
जख्मों पे नमक लगा देती है...
मोहब्बत ने हम पर ये इल्ज़ाम लगाया है,
वफ़ा करके बेवफा का नाम आया है,
राहें अलग नहीं थी हमारी फिर भी,
हमने अलग-अलग मंज़िल को पाया है...