Bewafa Shayari 6

बेवफा से दिल लगाने चले,
पत्थर से दिल को हम पिघलाने चले,
टूट कर बिखर गए हम टुकड़ो में,
पत्थरों के शहर में कांच का आशियाना जो बनाने चले...
चाहा था हमने जिसे उसे भुलाया ना गया,
ज़ख्म दिल के लोगों से छुपाया ना गया,
बेवफाई के बाद भी इतना प्यार करता हूँ कि,
बेवफा का इलज़ाम भी उस पर लगाया ना गया...
कुछ इस तरह से मेरी ज़िन्दगी को मैंने आसान कर लिया,
भूलकर तेरी बेवफाई, मेरी तन्हाई से मैंने प्यार कर लिया...
कभी किसी मुसाफिर से प्यार ना करना,
उनका ठिकाना बहुत दूर होता है,
वो कभी बेवफा तो नहीं होते,
मगर उनका जाना जरूर होता है...
जान कर भी वो मुझे जान ना पाए,
आज तक वो मुझे पहचान ना पाए,
खुद ही कर ली बेवफाई हमने,
ताकि उनपर कोई इलज़ाम ना आए...
मत रख हमसे वफ़ा की उम्मीद ऐ दोस्त,
हमने हरदम बेवफाई पाई है,
मत ढूंढ मेरे जिस्म पे ज़ख़्म के निशान,
हमने दिल पे चोट खाई है...
नाकाम नहीं मोहब्बत मेरी तो किससे करूँ शिकायात में,
ज़ख्म है जो दिल पे वो मेरे यार की इनायत है,
बेवफा है वो यार मेरा जिसकी चाहत मेरी इबादत है,
करके बेवफाई वो कहता है ये हम हुस्नवालों की आदत है...
खुद की मोहब्बत फनाह कौन करेगा,
सभी नेक बन गए, तो गुनाह कौन करेगा,
ऐ खुदा सनम बेवफा को सलामत रखना,
वरना हमारी मौत की दुआ कौन करेगा...
जबसे एक बेवफा का हमारा दिल में बसेरा हो गया,
दिल तो दिल था साया भी हमारा पराया हो गया,
हमें एतबार था प्यार की शमा से रोशन करेगा वो ज़िन्दगी को,
हरजाई ने ऐसा धोखा दिया कि ज़िन्दगी में अँधेरा हो गया...
अभी तो वैलेंटाइन को एक रात हुई है,
बेवफाई ना जाने किन-किन के साथ हुई है,
टूटे होंगे लाखों के दिल,
तभी तो आज जमकर बरसात हुई है...