Bewafa Shayari 4

इश्क करना तो लगता है जैसे,
मौत से भी बड़ी एक सजा है,
क्या किसी से शिकायत करे हम,
जब अपनी तकदीर ही बेवफा है...
वफ़ा के नाम से वो अनजान थे,
किसी की बेवफाई से शायद परेशान थे,
हमने वफ़ा देनी चाही तो पता चला,
हम खुद ही बेवफा के नामसे बदनाम थे...
हो गयी थी तब वो बेवफा,
अब चैन से हम भी सोते हैं,
पर दर्द सा उठता है दिल में,
जब मेरी कब्र पे आके रोतें हैं...
रोज़ ढ़लती हुई शाम से डर लगता है,
अब मुझे इश्क के अनजाम से डर लगता है,
जबसे मिली है बेवफाई मुझे इश्क में,
तबसे इश्क के नाम से भी डर लगता है...
ज़िन्दगी में तुझे चैन ना आयेगा,
तन्हाई का अँधेरा तुझे हर पल सताएगा,
जब कभी तुझसे भी करेगा कोई बेवफाई,
तब तुझे मेरा प्यार याद आएगा...
काँच को चाहत थी पत्थर पाने की,
एक पल में फिर टूट कर बिखर जाने की,
चाहत बस इतनी थी उस दीवाने की,
अपने हज़ार टुकड़ो में उसकी हज़ार तस्वीर सजाने की...
कोई मिला हमें चाँद की चाँदनी बनकर,
कोई मिला परियो की कहानी बनकर,
पर जिस किसी को पलकों में बसाया हमनें,
वो निकल गया आँख से पानी बनकर...
तुमसे क्या शिकवा-ए-सनम बेवफाई का,
जब मुझसे मेरा नसीब ही रूठ गया,
सच तो ये है मेरे सनम,
मैं तो वो बदनसीब खिलौना हूँ जो,
खेल खेल में टूट गया...
ज़िन्दगी से बस यही गिला है,
खुशी के बाद क्यूँ ग़म मिला है,
हमने तो उनसे वफ़ा ही की थी,
पर नहीं जानते थे कि वफ़ा का बेवफाई ही सिला है...
आज अचानक तेरी याद ने मुझे रुला दिया,
क्या करू तुमने जो मुझे भुला दिया,
ना करते वफ़ा तो ना मिलती ये सजा,
शायद मेरी वफाओं ने ही तुझे बेवफा बना दिया....