Bewafa Shayari 2

दिल के करीब होकर वो जब दूर हो गए,
हसीं ख्वाब मेरे चूर-चूर हो गए,
हमने वफ़ा निभाई तो रुसवाई मिली,
वो बेवफा होकर भी मशहूर हो गए...
दर्द ही सही मेरे इश्क का इनाम तो आया,
खाली ही सही हाथों में जाम तो आया,
मैं हूँ बेवफा सबको बताया उसने,
यूँही सही उसके लबों पे मेरा नाम तो आया...
मत पूछ मेरे सब्र का इन्तहा कहाँ तक है,
तू सितम कर ले, तेरी हसरत जहाँ तक है,
वफ़ा की उम्मीद जिन्हें होगी उन्हें होगी,
हमें देखना है तू बेवफा कहाँ तक है...
आज हम उन्हें बेवफा बताकर आए हैं,
उनके खतों को पानी में बहाकर आए हैं,
कोई पढ़ ना ले उन खतों को पानी से निकाल के,
इसलिए पानी में भी आग लगाकर आए हैं...
अनापन सिखा के जुदा हो गए,
ना सोचा ना समझा खफा हो गए,
दुनिया में एक बार हमने किसी को अपना कहा था,
वो भी लोगों की बातों में आकर बेवफा हो गए...
ज़ख्म की बात नहीं है जाने दर्द क्यों होता है,
धोके की बात नहीं है जाने एहसास क्यों होता है,
जानते हुए की वो बेवफा है,
ना जाने फिर भी प्यार क्यों होता है...
चलो यूँ ही जीना दुश्वार कर लेते हैं,
आओ हम किसी बेवफा से प्यार कर लेते हैं,

कोई प्यारी सी सूरत देखकर,
अपनी चाहत का इज़हार कर लेते हैं,

प्यार में कई बार धोखे खाए हैं,
ये खता फिर एक बार कर लेते हैं,

सुना है कि मोहब्बत कुर्बानी चाहती है,
खुद को मारने के लिए तैयार कर लेते हैं...
उससे जुदा तो हो गए पर यूँ लगा मुझे,
जैसे जहाँ में कोई अपना नहीं रहा,
वो बेवफा नहीं मगर इतना ज़रूर है,
पहले वो जिस तरह का था वैसा नहीं रहा...
जा छोड़ दिया तुझे, कोई हिसाब-ऐ-इश्क नहीं मांगते,
शिकवा नहीं, शिकायत नहीं, कोई गुस्सा नहीं,
जा हम तुझे अब और नहीं जानते...
बहुत कम लोग होते हैं, जमाने में ऐसे,
सच्ची चाहत की जिन्हें पहचान होती है,
इतना सोच लेना किसी पर मर मिटने से पहले,
की गँवाने के लिए एक जान होती है...