Aankhen Shayari 1

दूरियों की परवा ना कीजिये,
जब दिल चाहे बुला लीजिये,
हम ज्यादा दूर नहीं आपसे,
बस आँखों को पलकों से मिला लीजिये...
तुम्हारी आँखों की क्या तारीफ़ करूँ,
बस इनमें डूब जाने की ख्वाहिश है,
पहले ही तेरी अदा के दीवाने हैं,
अब किस बात की गुंजाईश है...
हमारी आँखों में आंसू हो तो क्या हो,
वो हमसे खफा हो जाएं तो क्या हो,
हम दुनिया वालों से छुप तो नहीं सकते,
मगर अपने ही ज़ख्म दें तो क्या हो...
सामने ना हो तो तरसती हैं आँखें,
याद में तेरी बरसती हैं आँखें,
मेरे लिए ना सही, इनके लिए ही आ जाया करो,
तुमसे बेपनाह मोहब्बत करती हैं ये आँखें...
भर आई आँखें जब उनका नाम आया,
इश्क नाकाम ही सही फिर भी बहुत काम आया,
हमने इश्क में ऐसी भी गुजारी हैं रातें,
जबतक आंसू ना बहे दिल को आराम ना आया...
थोड़ी-थोड़ी साँसों के लिए, हमने ज़िन्दगी बेची,
परछाइयों से तंग आके, हमने रौशनी बेची,
आँखों में बस आंसू ही रह गए,
वरना दुनियावाओं ने तो दोस्ती भी बेची...
तुम्हारी आँखों में आंसुओ की चमक देखी,
तुम्हारे चेहरे पर गम की तस्वीर देखी,
फिर पूछा क्या बात है तो कहने लगे,
ख्वाब में तुमसे जुदाई की झलक देखी...
कोई आँखों-आँखों से बात कर लेता है,
कोई आँखों-आँखों में मुलाकात कर लेता है,
बड़ा मुश्किल होता है जवाब देना,
जब कोई खामोश रहकर सवाल कर लेता है...
जब खुदा ने तुझे बनाया होगा,
एक आधा जाम तो उसने भी लगाया होगा,
ऐसे ही नशीली नहीं तेरी आँखें,
जाम का कुछ असर तो तेरे में भी आया होगा...
ये कौन मुस्कुरा कर इधर से गुज़र गया,
बे नूर रास्तों में उजाला बिखेर गया,
सोचा बहुत किसी से प्यार ना हो मगर,
आँखों की राह से कोई दिल में उतर गया...