2 Line Shayari Shayari 36

ज़िन्दगी की कश-म-कश में थोड़ा उलझ गए हैं दोस्तों,
वर्ना हम तो उन में से हैं जो दुश्मनों को भी अकेला महसूस नहीं होने देते..
कोई नहीं था कभी इतने करीब मेरे,
इश्क में रंगी बस एक मेरी रूह थी वहाँ..
हमें ये दिल हारने की बीमारी ना होती,
अगर आपकी दिल जीतने की अदा इतनी प्यारी ना होती..
होठों की भी क्या मजबूरी होती है,
वही बात छुपाते हैं जो कहना ज़रूरी होती है..
ख़ुदा का शुक्र है उसने ख़्वाब बना दिया,
वरना, तमन्ना तुम से मिलने की कभी पूरी नहीं होती..
बेरुखी किस शिद्दत से निभाई जाती है कोई उनसे सीखे,
आँखें खुली रखते हैं और कहते हैं हम दिखते ही नहीं..
ज़िन्दगी यूँ ही बहुत कम है मोहब्बत के लिए,
रूठ कर वक़्त गँवाने की ज़रूरत क्या है..
याद रखना ही मोहब्बत में नहीं है सब कुछ,
भूल जाना भी बड़ी बात हुआ करती है..
कुछ इस तरह वो मेरी बातों का ज़िक्र किया करती है,
सुना है वो आज भी मेरी फ़िक्र किया करती है..
जिन्हें सांसों की महक से इश्क महसूस ना हो,
वो गुलाब देने भर से हाल-ए-दिल क्या समझेंगे..