2 Line Shayari Shayari 30

बहुत धुन्ध है मेरे शहर में,
अपने दिखते नहीं और जो दिखते है वो अपने नहीं।
मोहब्बत अब समझदार हो गई है,
हैसियत देखकर आगे बढ़ती है..
गिरते हुए आँसुओं को कौन देखता है,
झूठी मुस्कान के दीवाने हैं सब यहाँ..
मेरी ज़िन्दगी से खेलना तो सबकी आदत बन गई है,
काश खिलौना बनके बिकते तो किसी एक के हो ही जाते..
यादें हमारी भी असर रखती हैं,
याद आएँगे बहुत ज़रा भूलकर तो देखो..
नहीं करेंगे आज के बाद कभी मन्नतें तुम्हारी,
ख़ुदा जब राज़ी होगा तब तुम क्या हर चीज़ मेरी होगी..
ना रोने की वजह थी ना हँसने का बहाना,
क्यों इतने बड़े हो गए इससे अच्छा तो वो बचपन का ज़माना था..
चुभता तो बहुत कुछ मुझको भी है तीर की तरह,
मगर खामोश रहता हूँ अपनी तकदीर की तरह..
पतझड़ आती है तो पत्ते टूट जाते हैं,
नया साथ मिल जाए तो पुराने छूट ही जाते हैं..
मैंने उसे कहा आसमान कितना बड़ा है ना,
पगली ने गले लगाया और कहा इससे बड़ा तो नहीं..