2 Line Shayari Shayari 1

इसी को कहते हैं जन्नत इसी को दोज़ख भी,
वो ज़िन्दगी जो हसीनों के दरमियाँ गुज़रे..
करीब आ तेरी आँखों में, देख लूँ खुद को,
बहुत दिनों से कोई आइना नहीं देखा..
बस तुम्हें पाने की तमन्ना नहीं रही अब,
प्यार तो हम आज भी बेशुमार करते हैं..
तजुर्बा कहता है कि मोहब्बत से किनारा कर लूँ,
और दिल कहता है कि ये तजुर्बा दोबारा कर लूँ..
दामन-ऐ-दिल से लिपट जाते हैं तेरी याद के जुगनू अक्सर,
लोग कुछ ऐसे भी हैं ज़िन्दगी में जो भुलाए नहीं जाते..
एक बार देख के आज़ाद कर दे मुझे,
मैं आज भी तेरी पहली नज़र की क़ैद में हूँ..
ये दिल वो नगर नहीं जो फिर आबाद हो सके,
सुनो पछताओगे तुम ये बस्ती उजाड़ के..
कैसे कह दूं मिला नहीं नसीब से कुछ मुझको,
मैंने जब भी माँगा तेरी ख़ुशी मांगी तुम्हें नहीं माँगा..
मोहब्बत में सर को झुका देना कोई मुश्किल नहीं,
रोशन सूरज भी चाँद की खातीर डूब जाता है..
उसकी दर्द भरी आँखों ने जिस जगह कहा था अलविदा,
आज भी वहीं खड़ा है दिल उसके आने के इंतज़ार में..